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ऑपरेशन सिंदूर: पाकिस्तान के पास बचने के लिए कितना वक्त, वर्षों पहले चेतावनी दे गए हैं अमेरिकी रक्षा रणनीतिकार

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नई दिल्ली

भारत और पाकिस्तान के बीच 22 अप्रैल को ‘पहलगाम आतंकी हमला’ को लेकर चार दिनों तक सैन्य टकराव हुआ। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत करने से लेकर इसपर अस्थायी ब्रेक लगाने के बीच जिस गति से जवाबी कार्रवाई की, उसने क्षेत्र में युद्ध के नियमों को बदल दिया है। भारत को इस ऑपरेशन में अप्रत्याशित सफलता मिली है, यह पाकिस्तान की ओर से दबी जुबान में आई प्रतिक्रिया और इसपर सामने आई वैश्विक टिप्पणियों से भी साबित हो चुका है। लेकिन, जिस तरह से भारत का यह आधिकारिक स्टैंड है कि ऑपरेशन सिंदूर बंद नहीं हुआ है, बल्कि इसे सिर्फ स्थगित किया गया है, उससे एक सवाल बार-बार उठ रहा है कि इस स्टैंड के मायने क्या हैं? क्योंकि, अब भारत ने यह भी आधिकारिक रूप से घोषित कर दिया है कि पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद अब ‘नॉन-स्टेट एक्टर’ का मामला नहीं रह गया है। यह पाकिस्तान की आधिकारिक नीति का हिस्सा है, जिसमें पाकिस्तानी फौज सक्रिय रूप से शामिल है। ऐसे में प्रश्न है कि अब हम संभावित पूर्ण युद्ध से कितनी दूर है? इसे समझने के लिए एक प्रसिद्ध अमेरिकी रक्षा रणनीतिकार के मॉडल का इस्तेमाल किया जा सकता है।

‘नाटकीय सैन्य टकराव’ तक पहुंची स्थित
कोल्ड वॉर के समय के एक अमेरिकी रक्षा रणनीतिकार हरमन क्हन(Herman Kahn) ने युद्ध के बढ़ने के 44 चरणों का एक मॉडल बनाया था। इस मॉडल के अनुसार,ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच का टकराव 9वें चरण ‘ड्रामेटिक मिलिट्री कंफ्रंटेशंस'(नाटकीय सैन्य टकराव) तक पहुंच गया था। 10 मई को संघर्ष विराम हो गया। तब से यह सवाल है कि आगे क्या होगा? और यह स्थिति कब एक बड़े युद्ध में बदल सकती है? हरमन ने बताया है कि युद्ध की स्थिति कैसे बढ़ती है। उन्होंने इसके लिए एक काल्पनिक सीढ़ी तैयार की, जिसमें हर पायदान युद्ध के एक नए स्तर को दिखाता है। पहला पायदान राजनयिक संकट से शुरू होता है और आखिरी पायदान पूर्ण युद्ध तक जाता है। इस आधार पर पहलगाम में हुआ आतंकी हमला पहला चरण था। जिसे ‘ओस्टेंसिबल क्राइसिस’ (प्रत्यक्ष संकट) कहा गया है। भारत ने कूटनीतिक, आर्थिक और सैन्य तरीके से जवाब दिया और हरमन के सीढ़ियों के पायदान पर हालात ऊपर चढ़ता गया। आखिर में यह 9वें चरण तक पहुंच गया, जिस स्थिति में जाकर संघर्ष विराम पर बात बनी।

12वें चरण में पहुंचते ही शुरू होगा पारंपरिक युद्ध
हरमन क्हन की थ्योरी के अनुसार अब आने वाले ऊपर के पायदान और भी खतरनाक हैं। अगर भारत को पाकिस्तान ने फिर से उकसाया, तो वह ‘न्यू नॉर्मल’ नीति के तहत निचले पायदानों को छोड़ सकता है और सीधे तीसरे या उससे ऊपर के पायदान से शुरुआत कर सकता है। इसके बाद 10वां चरण आ सकता है, जिसमें ‘प्रोवोकेटिव ब्रेकिंग ऑफ डिप्लोमेटिक रिलेशंस’ यानी राजनयिक संबंधों को सीधे-सीधे तोड़ना शामिल है। फिर 11वां चरण आ सकता है, जिसमें ‘स्पेकटेक्युलर शो और डेमोंस्ट्रेशन ऑफ फोर्स’ यानी शक्ति का प्रदर्शन करना शामिल है। इसके बाद 12वां चरण आ सकता है, जिसमें ‘लार्ज कन्वेंशनल वॉर’ यानी बड़ा पारंपरिक युद्ध शामिल है। ऐसा युद्ध दक्षिण एशिया में 1971 के बाद नहीं देखा गया है।

ऑपरेशन सिंदूर ने बदल दिए पाकिस्तान के लिए हालात
दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय रणनीति में एक बड़ा बदलाव कर किया है। अब भारत सैन्य कार्रवाई करने के लिए इंतजार कम ही करेगा और उसकी प्रतिक्रिया भी सीधी,तेज और सटीक होगी। 2016 में हुई सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 में हुई बालाकोट एयरस्ट्राइक इसकी शुरुआत थी। 2025 में भारत ने पाकिस्तान के अंदर गहराई तक हमला किया और आतंकवादी ढांचे के साथ-साथ उसके सैन्य और वायु ठिकानों को भी तबाह कर दिया।

15वें चरण में पहुंचने का मतलब है पाकिस्तान साफ
इसका मतलब है कि अब अगर कोई बड़ा आतंकी हमला होता है, खासकर जिसमें बहुत सारे लोग मारे जाते हैं, तो भारत बीच के चरणों को छोड़ सकता है। भारत सीधे 9वें चरण या उससे ऊपर जाकर सीधे हमला कर सकता है, यहां तक कि उसके पहले भी हमला कर सकता है। हरमन क्हन के मॉडल में, अगर इस तरह के युद्ध को रोका नहीं गया, तो यह तेजी से 14वें चरण ‘सेंट्रल वॉर – लोकल ऑब्जेक्टिव्स'(केंद्रीय युद्ध – स्थानीय उद्देश्य) या यहां तक कि 15वें चरण ‘सेंट्रल वॉर – एग्जेम्प्लरी'(केंद्रीय युद्ध – कठोर या देखने लायक) तक जा सकता है। मतलब, ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने जो सैन्य ताकत की झलक दिखाई है, उस हिसाब से इस चरण तक पहुंचने का मतलब है कि पाकिस्तान के अस्तित्व पर संकट आ सकता है।

भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में है। पाकिस्तान खुद को भारत के हमले का शिकार बता रहा है और दुनिया के मंचों पर झूठी बातें फैला रहा है। यही नहीं, जैसे-जैसे युद्ध का तरीका बदल रहा है, भारत को साइबर हमले, सैटेलाइट को नुकसान पहुंचाने, ड्रोन से हमले और सूचना युद्ध के लिए भी तैयार रहना जरूरी है। इन तरीकों से दुश्मन पारंपरिक युद्ध शुरू किए बिना भी नुकसान पहुंचा सकता है।

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