नई दिल्ली,
अमेरिका चुनाव में सत्ता पलट गई है. अब डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अमेरिका के राष्ट्रपति होंगे. अमेरिकी राजनीति में आए बदलाव का असर दूसरे देशों के साथ संबंधों पर भी देखने को मिलेगा. ट्रंप के पिछले कार्यकाल में जिन देशों को ज्यादा तवज्जो दी गई, वह देश एक बार फिर उसी उम्मीद पर टिके हुए हैं. ताइवान का हाल भी कुछ ऐसा ही है जो फिलहाल अमेरिका के साथ बड़ी डिफेंस डील करके ट्रंप को खुश करना चाहता है.
हालांकि, चीन ऐसा बिल्कुल नहीं होने देना चाहता है लेकिन अगर दूसरे कार्यकाल में ट्रंप का झुकाव ताइवान की ओर ज्यादा रहा तो यह उसके लिए चिंता की स्थिति जरूर हो सकती है. दूसरी ओर, ताइवान सरकार के उच्च अधिकारी तो दबे मुंह बड़ी डिफेंस डील की बात कर रहे हैं लेकिन सरकार आधिकारिक तौर पर कुछ भी बताने से बचती हुई नजर आ रही है.
ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग ते की प्रवक्ता कैरिन कुओं ने यह तो पुष्टि करते हुए नहीं बताया कि ट्रंप की टीम और ताइवान के उच्च अधिकारी किसी रक्षा पैकेज पर बातचीत कर रहे हैं. लेकिन उन्होंने कहा कि ताइवान व आसपास के क्षेत्र में चीन की ओर से लगातार बढ़ते सैन्य खतरे का सामना करते हुए, हम और आसपास के अन्य देश अपनी सुरक्षा को लगातार मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं.
दूसरी ओर, ट्रंप की टीम की ओर से इस बात पर कोई प्रतिक्रया नहीं दी गई. हालांकि, अमेरिका में स्थित चीनी दूतावास ने प्रतिक्रिया जरूर दी. चीनी दूतावास की ओर से कहा गया कि अमेरिका को ताइवान को हथियार बेचना बंद कर देना चाहिए.
अमेरिका से कौन से हथियार या उपकरण चाहता है ताइवान
ताइवान की इस स्थिति पर नजर रख रहे कुछ लोगों का मानना है कि ट्रंप के सत्ता में आने के बाद ताइवान अमेरिका से लॉकहीड मार्टिन जहाज और एक एयरबोर्न रडार सिस्टम (नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन ई-2डी एडवांस्ड हॉक आई) की मांग कर सकता है. इसके साथ ही ताइवान कुछ मिसाइल और एफ-35 फाइटर जेट्स के लिए भी बात कर सकता है.
अमेरिका में ट्रंप प्रशासन का हिस्सा रह चुके एक पूर्व अधिकारी ने कहा कि ताइवान एक ऐसे पैकेज के बारे में सोच रहा है जो यह दर्शा सके कि वह इस मामले में गंभीर हैं. उन्होंने कहा कि मान लीजिए कि अगर वह ऐसा करते हैं, तो जब उनका नाम सामने आएगा तो वह अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पास जाएंगे और अमेरिकी हथियारों का एक बहुत ही बड़ा पैकेज पेश करेंगे.
ताइवान सरकार और डोनाल्ड ट्रंप की टीम की गुपचुप हो रही बात?
ताइवान के एक वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि इस बारे में ट्रंप की टीम के साथ अनौपचारिक चर्चा हुई थी कि किस तरह का हथियार पैकेज ताइवान की रक्षा के लिए सबसे बेहतर होगा. उन्होंने आगे कहा कि ऐसे बहुत से हथियार और उपकरण हैं जिन पर लंबे समय से हमारी सेना की नजर है लेकिन हम उन्हें ले नहीं पा रहे हैं. ऐसे में काफी चीजें हैं जो ली जा सकती हैं.
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि एजिस कॉम्बैट सिस्टम हमारी प्राथमिकता है. बता दें कि एजिस कॉम्बैट सिस्टम एक अमेरिकी नौसैनिक हथियार प्रणाली है. हालांकि, अधिकारियों और डिफेंस एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि इनके अलावा भी कई और महंगी चीजें हैं जो ताइवान को चाहिए भी और उससे अमेरिका पर भी बड़ा प्रभाव पड़ेगा.
ताइवान रक्षा मंत्रालय के इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल डिफेंस एंड सिक्योरिटी रिसर्च के वरिष्ठ अधिकारी सु जू युन कहते हैं कि अगर आप अमेरिका से हथियार लेने की विश लिस्ट की बात कर रहे हैं तो यह समय एफ-35 फाइटर जेट्स की मांग करने का है.
वहीं ट्रंप के पहले कार्यकाल में रहे एक पूर्व पेंटागन अधिकारी हीनो क्लिंक ने कहा कि ताइवान की खुद की रक्षा के लिए ज्यादा खर्च करने वाली सोच एकदम सही है. अधिकारी ने बताया कि ट्रंप के पहले कार्यकाल में दोनों देशों के बीच हथियारों को लेकर ऐतिहासिक डील हुई थी. हालांकि, क्लिंक ने आगे कहा कि अगर ताइवान अमेरिका से एफ-35 फाइटर जेट्स का अनुरोध करता है तो यह परिचालन या आर्थिक नजरिए से ज्यादा सार्थक नहीं होगा.
अमेरिका-ताइवान बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष ने इस बारे में कहा कि अमेरिका को यह बात पता है कि ताइवान पिछले काफी समय से डिफेंस सेक्टर में खर्चा कर रहा है और अभी भी काफी खर्च और करने की जरूरत है. दूसरी ओर ताइवान के अधिकारियों का मानना है कि ट्रंप ने पिछली बार ताइवान के साथ अच्छी डील की थी, ऐसे में इस बार भी संबंध ऐसे ही बेहतर रह सकते हैं.
बता दें कि ट्रंप के पहले कार्यकाल में अमेरिका ने ताइवान के साथ 11 डिफेंस पैकेज की डील की थी जिसमें एफ-16 फाइटर जेट्स और अबराम टैंक भी शामिल थे. यह डील 21 अरब डॉलर में तय हुई थी. जबकि जब बाइडन अमेरिका की सत्ता में आए तो उन्होंने सिर्फ 7 अरब डॉलर के पैकेज को ही मंजूरी दी थी.
