स्टार कॉमेडियन भारती सिंह (Bharti Singh) दूसरी बार माँ बनने वाली हैं. हाल ही में अपने यूट्यूब चैनल पर साझा किए गए एक ब्लॉग में, भारती ने खुलासा किया कि उनकी तबियत ठीक नहीं है क्योंकि उनके शरीर में ब्लड शुगर (Blood Sugar) का स्तर बहुत अधिक बढ़ गया है. डॉक्टर ने भी उन्हें इतनी तेज़ी से शुगर लेवल बढ़ने के लिए डांटा है.
भारती की इस खबर से यह चिंता बढ़ गई है कि क्या गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान बढ़ा हुआ शुगर लेवल बच्चे को डायबिटीज (Diabetes) जैसी बीमारी दे सकता है? आइए समझते हैं कि प्रेग्नेंसी में हाई शुगर का बच्चे पर क्या असर पड़ता है और यह आनुवंशिक (Genetic) रूप से कैसे पास हो सकता है.
1. प्रेग्नेंसी में बढ़ी शुगर: जेस्टेशनल डायबिटीज
गर्भावस्था के दौरान शरीर में शुगर का स्तर बढ़ने या डायबिटीज होने को जेस्टेशनल डायबिटीज (Gestational Diabetes) कहा जाता है.
- आनुवंशिक जोखिम: डायबिटीज माँ से बच्चे को हो सकता है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि माँ को किस प्रकार का डायबिटीज है और गर्भधारण के समय उनका शुगर नियंत्रण कितना था.
2. टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज: आनुवंशिकता का खतरा
डायबिटीज अलग-अलग प्रकार की होती है, और हर प्रकार में बच्चे को बीमारी होने का खतरा अलग होता है.
- टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes): यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है. अगर माँ को टाइप 1 डायबिटीज है, तो बच्चे में इसके विकसित होने का जोखिम अधिक होता है. हालाँकि, पिता से यह जोखिम ज़्यादा होता है, पर माँ से भी संभावना बनी रहती है.
- टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes): यह आनुवंशिकता (Genetics) और जीवनशैली दोनों से जुड़ा है. यदि माँ को टाइप 2 डायबिटीज है, तो बच्चे में भी टाइप 2 डायबिटीज विकसित होने का आनुवंशिक जोखिम बना रहता है.
3. जेस्टेशनल डायबिटीज का बच्चे पर असर
अगर माँ का शुगर लेवल प्रेग्नेंसी के दौरान नियंत्रण में नहीं रहता है, तो अतिरिक्त ग्लूकोज प्लेसेंटा (Placenta) के ज़रिए बच्चे तक पहुँचता है.
- अतिरिक्त इंसुलिन: इस बढ़े हुए शुगर को संभालने के लिए बच्चे का पैंक्रियाज़ (Pancreas) ज़्यादा इंसुलिन बनाता है.
- वज़न बढ़ना: इससे बच्चे का वज़न बढ़ जाता है, जिससे डिलीवरी में जटिलताएँ (Complications) आ सकती हैं.
- भविष्य का खतरा: बच्चे में मोटापा (Obesity) और टाइप 2 डायबिटीज विकसित होने का जोखिम भी बाद के जीवन में बढ़ जाता है.
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4. बचाव के लिए क्या करें?
माँ को गर्भावस्था के दौरान अपने शुगर स्तर को नियंत्रित रखने का हर संभव प्रयास करना चाहिए ताकि बच्चे को डायबिटीज के जोखिमों से बचाया जा सके.
- नियंत्रण ज़रूरी: डॉक्टर की सलाह पर संतुलित आहार लें और नियमित रूप से व्यायाम करें.
- नियमित जाँच: ब्लड शुगर की नियमित जाँच और सही दवाएँ लेना बहुत महत्वपूर्ण है.
