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‘घर-घर सिंदूर’ अभियान की ख़बरों को बीजेपी ने दो दिन बाद फ़ेक क्यों बताया?

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नई दिल्ली

पिछले कुछ दिनों से ‘घर-घर सिंदूर’ अभियान की ख़बरें भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई थीं। दावा किया गया था कि बीजेपी ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक अभियान शुरू करेगी जिसके तहत देश भर में घर-घर सिंदूर पहुँचाया जाएगा। इस पर विपक्षी नेता जमकर बरसते रहे। बीजेपी की ख़ूब किरकिरी होती रही। और इसी बीच दो दिन बाद अब बीजेपी ने ‘घर-घर सिंदूर’ अभियान की ख़बर को फ़ेक बता दिया है। बीजेपी ने शुक्रवार शाम को आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने घर-घर सिंदूर बांटने का कोई कार्यक्रम निर्धारित नहीं किया है। इसने ट्विटर पर इसको लेकर ट्वीट किया है।

बीजेपी ने यह तो नहीं कहा है कि यह ख़बर कहाँ से फैली, लेकिन इसने दैनिक भास्कर की ख़बर का एक स्क्रीनशॉट साझा किया है जो 28 मई को छपी थी। इस ख़बर में बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से कहा गया था कि पीएम मोदी ने अपने तीसरे कार्यकाल के लिए 9 जून को शपथ ली थी इसलिए इसी दिन से बीजेपी ‘घर-घर सिंदूर पहुँचाने’ का अभियान शुरू करेगी।

‘घर-घर सिंदूर’ अभियान की ख़बरें पहली बार दैनिक भास्कर जैसे कुछ प्रमुख समाचार पत्रों और टीवी चैनलों पर सामने आई थीं। दावा था कि बीजेपी ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकवाद के खिलाफ अपनी मजबूत कार्रवाई को प्रचारित करने के लिए इस अभियान की योजना बनाई है। भारत ने 7 मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमलों के लिए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस अभियान को कथित तौर पर हिंदू संस्कृति के प्रतीक सिंदूर से जोड़ा गया, जिसे बीजेपी द्वारा प्रचारित किए जाने की बात कही गई।

‘घर-घर सिंदूर’ अभियान की खबरें जल्दी ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं और विपक्षी दलों ने इसे बीजेपी की धार्मिक ध्रुवीकरण की रणनीति का हिस्सा बताकर तीखी आलोचना शुरू कर दी। ममता बनर्जी ने गुरुवार को ही एक आधिकारिक मंच से इस अभियान को ‘सांप्रदायिक राजनीति’ का हिस्सा बताते हुए बीजेपी पर निशाना साधा था। ममता ने कहा था, ‘वह यहाँ सिंदूर बेचने आए हैं। यह महिलाओं का अपमान है।’ उन्होंने इसे केवल एक राजनीतिक स्टंट क़रार दिया। उन्होंने कहा कि यह हिंदू धर्म के प्रतीकों का राजनीतिकरण करने की कोशिश है, जो सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकता है। इसी तरह, कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने इसे बीजेपी की ‘वोट बैंक पॉलिटिक्स’ का हिस्सा बताया।

सुप्रिया श्रीनेत ने भी कहा, “ब्याहता हूँ तो एक बात जानती हूँ कि सिर्फ़ पति के नाम के सिंदूर से माँग भरी जाती है – वही सुहाग का प्रतीक है। किसी भी ऐरे गैरे नत्थू खैरे का सिंदूर नहीं लगा लिया जाता। कौन हैं यह बीजेपी वाले जो सिंदूर लेकर आयेंगे- एक से एक गुंडे, मवालियों से भरी हुई है यह पार्टी। कौन लायेंगे सिंदूर? वह बलिया वाले बब्बन सिंह, या हाईवे वाले मनोहरलाल धाकड़ या मध्यप्रदेश में भद्दे नाच के शौकीन कमल रघुवंशी, या बलात्कार के लिए सज़ा काट रहे कुलदीप सेंगर, या पोक्सो में दोषी इनके विधायक रामदुलार गौंड? ऐसे लीचड़ लोग घर घर जाकर अब आपकी बहुओं, बेटियों और पत्नियों को सिंदूर देंगे- क्योंकि इन्हीं जैसों से तो भरी पड़ी है पूरी की पूरी बीजेपी – और इन्हीं को तो दी है नरेंद्र मोदी ने यह ज़िम्मेदारी। सनातन संस्कृति यही है – सिंदूर: समर्पण, प्रेम और हर परिस्थिति में एक दूसरे के पूरक होने का प्रतीक है। सिंदूर का मान नहीं रखने वाले, सिंदूर को तो बख्श देते।”

दो दिन बाद बीजेपी का खंडन
दो दिन तक इन ख़बरों के चलने के बाद बीजेपी ने आधिकारिक तौर पर इसे फर्जी करार दिया। अमित मालवीय ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि दैनिक भास्कर में छपी यह खबर ‘पूर्णतः असत्य और छलपूर्वक प्रेरित’ है, और बीजेपी ने कभी भी ‘घर-घर सिंदूर’ जैसा कोई अभियान शुरू करने की योजना नहीं बनाई। बीजेपी के आधिकारिक हैंडल ने भी यही बात दोहराई और इसे विपक्ष द्वारा प्रायोजित फेक न्यूज का हिस्सा बताया।

खबर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रिया ने बीजेपी को बैकफुट पर ला दिया। ममता बनर्जी और अन्य नेताओं की आलोचना ने इस अभियान को सांप्रदायिक बता दिया, जिससे बीजेपी को अपनी छवि को नुकसान पहुंचने का खतरा महसूस हुआ।

इसी बीच बीजेपी ने इस अभियान को फर्जी बताकर विवाद को शांत करने की रणनीति अपनाई। बीजेपी द्वारा इसे फ़ेक बताए जाने के बाद फिर से विपक्षी दलों ने निशाना साधा है। कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “यह है सिंदूर की ताक़त। भाग लिए भाजपाई। चले थे इस देश की ब्याहताओं को सिंदूर बाँटने। ऐसी फटकार लगी कि बैकफुट पर आ गए। अब अपनी घटिया योजना को फेक न्यूज़ बता रहे हैं। झूठे और ढोंगी लोग हैं बीजेपी वाले।”

कुछ जानकारों का मानना है कि यह ख़बर शुरू में किसी ग़लत सूचना या सनसनीखेज पत्रकारिता का नतीजा हो सकती है। हालाँकि, दैनिक भास्कर और अन्य मीडिया हाउसों की ओर से इस पर अभी तक कुछ बयान नहीं आया है। हो सकता है कि किसी अपुष्ट स्रोत के आधार पर इस खबर को प्रकाशित किया गया हो, जिसे बाद में बीजेपी ने खारिज कर दिया।

एक अन्य संभावना यह है कि बीजेपी ने वास्तव में इस तरह के किसी अभियान पर विचार किया हो, लेकिन विपक्ष और जनता की प्रतिक्रिया को देखते हुए इसे रद्द कर दिया और इसे फेक न्यूज करार देकर अपनी स्थिति को सुरक्षित करने की कोशिश की। हालांकि, इस बात के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं है।

हालांकि, बीजेपी के खंडन के बाद विपक्ष की प्रतिक्रिया कुछ हद तक कमजोर पड़ गई, क्योंकि यह संदेश गया कि कोई आधिकारिक अभियान की घोषणा नहीं की गई थी। घर-घर सिंदूर’ अभियान की ख़बर के खंडन का बीजेपी का यह कदम संभवतः विवाद को शांत करने और अपनी छवि को धार्मिक ध्रुवीकरण के आरोपों से बचाने की रणनीति का हिस्सा हो।

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