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13 साल पहले मर चुके व्यक्ति को बना दिया गवाह, फतेहपुर डीएम और प्रशासन से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

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फतेहपुर

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के एक मामले में तल्ख टिप्पणी करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फतेहपुर डीएम को स्पष्टीकरण के लिए 7 मई को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है। दरअसल, 13 साल पहले मर चुके व्यक्ति को जमीन के निरीक्षण का हलफनामा दाखिल कर डीएम ने गवाह बनाया है। वहीं हाईकोर्ट ने पूछा है कि मौका मुआयना के दौरान मृतक कैसे मौजूद था?

खागा तहसील क्षेत्र के मंझनपुर गांव निवासी जगदीश शरण सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। बताया कि गांव के तालाब की जमीन पर अतिक्रमण के आरोप में याची जगदीश पर जुर्माने लगाया गया था। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली। दायर याचिका में दावा किया है कि जगदीश ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा नहीं किया है। वहीं जिन लोगों ने अतिक्रमण किया है, उन पर प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।

दूसरी तरफ डीएम ने एफिडेविट के साथ क्षेत्रीय लेखपाल की 26 अक्तूबर 2024 की मुआयना रिपोर्ट दाखिल की है। रिपोर्ट में बताया गया कि गवाह छेदीलाल और मिथुन की मौजूदगी में मुआयना के दौरान पाया गया कि तालाब की सुरक्षित भूमि पर याची जगदीश का कब्जा है।

खुलासे के बाद हाईकोर्ट हैरान
मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के जज जेजे मुनीर की अदालत में हुई, जवाब में जगदीश के अधिवक्ता जगदीश सिंह बुंदेला ने हाईकोर्ट में छेदीलाल का मृत्यु प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया है। साथ ही बताया कि फतेहपुर डीएम जिस छेदीलाल को गवाह बता रहे हैं, उसकी मौत 20 अप्रैल 2011 को हो चुकी है। वहीं दूसरा गवाह मिथुन सिंह भी गांव का नहीं है। इस खुलासे के बाद हाईकोर्ट हैरान हो गया। इस पर कोर्ट ने डीएम और लेखपाल से मुआयना रिपोर्ट की सभी जानकारियां तलब की हैं।

सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार का प्रमाण: हाई कोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि यह विवाद केवल एक व्यक्ति से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह पूरे सरकारी तंत्र के ईमानदारी और जवाबदेही पर जिम्मेदारों को कटघरे में खड़ा कर रहा है। 13 साल पहले मरे हुए व्यक्ति को आखिर भूमि निरीक्षण का गवाह कैसे बनाया गया?याची ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से इस मामले में कोर्ट में जो प्रमाण पेश किए हैं। वह सरकारी व्यवस्था में गहराई तक फैले भ्रष्टाचार और कागजी हेरफेर का ठोस सबूत है।

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