झुंझुनू
भजनलाल सरकार ने निकाय चुनाव से पहले जीत की कवायद में एक कदम बढ़ाया है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि जीत की गोटी फिट बिठाने के लिए नगरपरिषद के सियासी सीमाओं को तलाशा है। झंझुनू में भी भाजपा सरकार ने परिसीमन करके 6 नए गांवों को नगर परिषद में शामिल कर दिया है। इससे वार्डों की तस्वीर बदलने के साथ ही राजनीतिक समीकरण भी बदल सकते हैं। यह कदम जीत की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे भाजपा अपने पार्षदों की संख्या बढ़ाकर सभापति की कुर्सी पर कब्जा जमाना चाहती है। हालांकि, इस फैसले का शहर भाजपा के कुछ नेताओं ने पहले विरोध किया था, लेकिन अब वे चुप्पी साधे हुए हैं। वहीं, विपक्षी दल कांग्रेस भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
नगरपरिषद सीमा विस्तार: सियासी गणना और गांवों का समावेश
परिसीमन के तहत झुंझुनू नगरपरिषद में सीतसर, खंगा का बास, वारिसपुरा, दीपलवास, भूरीवास और बाडलवास गांवों को शामिल किया गया है। इन गांवों की कुल आबादी 4,013 है। हालांकि, वार्डों की संख्या 60 यथावत रखी गई है। इन गांवों को मौजूदा वार्डों में शामिल किया जाएगा।
भाजपा नेताओं के विरोध के बाद भी हुआ विस्तार
परिसीमन प्रस्ताव को लेकर पहले भाजपा के कई नेताओं ने विरोध किया था। ज्ञापन देकर और जयपुर तक दौड़ लगाकर उन्होंने इस कदम को रोकने की मांग की थी। लेकिन जब सरकार ने आदेश जारी कर दिए, तो विरोध करने वाले भाजपा नेता फिलहाल खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। अंदरखाने से यह जरूर चर्चा है कि इस फैसले को लेकर असंतोष कायम है।
शहरी और ग्रामीण राजनीति के समीकरण
गांवों को नगरपरिषद में शामिल करने से झुंझुनू की राजनीतिक स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। जानकारों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्र के समावेश से शहरी नेताओं का वर्चस्व कम हो सकता है। इससे नगरपरिषद सभापति के चुनाव में भी नए समीकरण उभरेंगे।
नगर निकाय चुनाव से पहले परिसीमन की कवायद
नगर निकाय चुनाव से पहले सरकार परिसीमन कर रही है, जिस निकाय क्षेत्र की जनसंख्या 15 हजार से कम है, वहां 20 वार्ड बनेंगे। जिन निकायों में 15 से 25 हजार तक की जनसंख्या है, वहां 25 वार्ड होंगे। 25 हजार से ज्यादा और 40 हजार तक की आबादी वाली निकायों में 35 वार्ड होंगे। 40 से 60 हजार तक की जनसंख्या वाली निकायों में 40 वार्ड, 60 से 80 हजार तक की जनसंख्या वाली निकायों में 45 वार्ड, 80 हजार से एक लाख जनसंख्या वाली निकायों में 55 वार्ड रखे जाएंगे। एक से दो लाख तक की जनसंख्या वाले निकायों में 60 वार्ड, 2 से 3.50 लाख तक की जनसंख्या वाली निकायों में 65 वार्ड, 3.50 से 5 लाख तक की जनसंख्या वाली निकायों में 70 वार्ड बनेंगे।
