जयपुर
राजस्थान की भजनलाल सरकार की वित्त मंत्री दीया कुमारी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट विधानसभा में प्रस्तुत किया। बजट पेश होने के बाद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बड़ी-बड़ी घोषणाएं करती है, लेकिन पेंशन और सैलरी देने के लिए आवश्यक धनराशि नहीं है। उन्होंने सरकार की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले बजट में अनुमानित राजस्व प्राप्ति के लक्ष्य भी पूरे नहीं किए जा सके। जूली ने इस बजट को लोकलुभावन बताते हुए इसे जनता को भ्रमित करने वाला करार दिया।
विपक्ष ने पेंशन और वेतन पर सरकार को घेरा
वित्त मंत्री दीया कुमारी ने बुधवार को विधानसभा में दो घंटे 19 मिनट तक बजट भाषण पढ़ा। इस दौरान कांग्रेस विधायकों ने कई बार विरोध जताया। बजट पेश होने के बाद टीकाराम जूली ने एक बार फिर सरकार पर हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भजनलाल सरकार भले ही बड़ी घोषणाएं करे, लेकिन जनता को पेंशन और कर्मचारियों को वेतन देने के लिए उनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। उन्होंने कांग्रेस सरकार द्वारा लाए गए ‘न्यूनतम आय गारंटी कानून’ का जिक्र करते हुए कहा कि इस कानून के तहत हर साल पेंशन में बढ़ोतरी का प्रावधान था। जूली ने दावा किया कि इस साल पेंशन की राशि 1,300 रुपये होनी चाहिए थी, लेकिन यह केवल 1,250 रुपये तक ही सीमित रह गई।
किरोड़ी लाल मीणा पर भी टिप्पणी
टीकाराम जूली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री किरोड़ी लाल मीणा को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किरोड़ी लाल मीणा सरकार के लिए “गले की फांस” बन चुके हैं। उन्होंने विधानसभा सत्र के दौरान किरोड़ी लाल मीणा की अनुपस्थिति पर सवाल खड़े किए और कहा कि जब कृषि बजट पढ़ा जा रहा था, तब उन्हें सदन में होना चाहिए था। जूली ने फोन टैपिंग के आरोपों का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा और कहा कि इस पर अब तक चुप्पी क्यों साधी गई है।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की योजना का जिक्र
टीकाराम जूली ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि 2023 में राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने ‘राजस्थान न्यूनतम आय गारंटी’ विधेयक पारित कर सामाजिक सुरक्षा की गारंटी दी थी। इस कानून का उद्देश्य राज्य के नागरिकों को अतिरिक्त आय सहायता प्रदान करना था। इसके तहत सामाजिक सुरक्षा पेंशन का अधिकार दिया गया था और इसमें हर साल 15% की वृद्धि का प्रावधान किया गया था। नेता प्रतिपक्ष के इन बयानों के बाद राजस्थान की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब देखना यह होगा कि भजनलाल सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है।
