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2014 में तो बच गया था, बसपा के राष्ट्रीय पार्टी के दर्जे का इस बार क्या होगा? रहेगा बरकरार या छिनेगा?

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लखनऊः

साल 1997 में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने वाली बसपा के नेशनल स्टेटस पर एक बार फिर खतरा मंडरा रहा है। उसका नैशनल पार्टी स्टेटस तो 2014 में ही छिन सकता था, लेकिन चुनाव आयोग का साल 2016 में किए गया एक संशोधन उसके लिए संजीवनी बन गया था। इस संशोधन के मुताबिक समीक्षा 2019 में हुई थी और साल 2014 के बाद हुए विधानसभा चुनावों में बसपा 4 राज्यों में अपने राज्य पार्टी का दर्जा कायम रखने में कामयाब हुई थी लेकिन इस बार स्थितियां ऐसी नहीं हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे बसपा के लिए निराशाजनक रहे थे। वह एक बार फिर अपना खाता नहीं खोल सकी। वोट शेयर भी 2.04% रह गया है।

ऐसे में बसपा का नैशनल पार्टी स्टेटस खतरे में दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक चुनाव आयोग 2024 के चुनावों की सांख्यिकीय रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद समीक्षा प्रक्रिया शुरू करेगा। यह समीक्षा एक महीने के भीतर शुरू हो सकती है। जिसके बाद राजनीतिक दलों के नैशनल पार्टी के स्टेटस तय किया जाएगा।

क्या है राष्ट्रीय पार्टी होने के लिए पैमाना?
चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968 के अनुसार राष्ट्रीय पार्टी होने के लिए कुछ मानक पूरे करने होते हैं। उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिया जाता है, जिसके पास पिछले आम चुनाव में चार या अधिक राज्यों में कुल वैध वोटों का कम से कम 6 प्रतिशत और कम से कम चार सांसद हों। इसके अलावा पार्टी के पास लोकसभा में कम से कम दो प्रतिशत सीटें हों जो कम से कम तीन राज्यों में हों या वह कम से कम चार राज्यों में एक मान्यता प्राप्त राज्य पार्टी हो।

बीएसपी पर क्यों मंडरा रहा खतरा?
बसपा 18वीं लोकसभा में कोई भी सीट जीतने में विफल रही है। इसके अलावा उसका वोट प्रतिशत भी 2.04% रहा है। ऐसे में वह राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त करने के पहले दो पैमानों में विफल है। तीसरी कसौटी के लिए बसपा को चार या अधिक राज्यों में मान्यता प्राप्त राज्य पार्टी होने की शर्तों को पूरा करना होगा। जिसे वह अभी तक पूरा नहीं करती है।

चुनाव दर चुनाव गिर रहा ग्राफ
यह पहली बार नहीं है कि बसपा की राष्ट्रीय स्थिति सवालों के घेरे में है। पिछले चार लोकसभा चुनावों में बसपा का राष्ट्रीय स्तर पर वोट शेयर काफी कम हो गया है। 2009 में पार्टी ने 6.17% वोट शेयर के साथ 21 सीटें जीती थीं लेकिन 2014 में सीटों की संख्या शून्य हो गई थी। जबकि वोट प्रतिशत 4.19% रह गया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में जब बसपा ने सपा के साथ गठबंधन किया तो बसपा ने 10 सीटें जीतीं लेकिन उसका वोट प्रतिशत 3.66% रह गया था। जबकि 2024 में उसका वोट शेयर 2.04% है जबकि सांसदों की संख्या शून्य।

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