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सांसद ने फिर छेड़ा ‘राजपूत’ वाला राग, कहा जाट सबसे बड़ा क्षत्रिय, फिर यादव और गुर्जर

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जयपुर:

नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे जातिगत वर्गीकरण पर टिप्पणी करते हुए कह रहे हैं कि ‘जाट सबसे बड़ा क्षत्रिय है, उसके बाद यादव, फिर गुर्जर आते हैं।’

‘अकेले नहीं हो क्षत्रिय’ – सभा में बोले बेनीवाल
एक जनसभा को संबोधित करते हुए बेनीवाल ने कहा, ‘इस देश में तुम अकेले क्षत्रिय नहीं हो, यह गलतफहमी निकाल दो। हिन्दुस्तान में सबसे बड़ा क्षत्रिय जाट है, फिर यादव और उसके बाद गुर्जर हैं। पटेल, पाटिल और मराठा भी क्षत्रिय हैं। अंत में तुम्हारा नंबर आता है।’

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की आईटी सेल समाजों के बीच फूट डालने का काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षत्रिय केवल एक जाति का नहीं होता, बल्कि जो युद्ध करता है, वही सच्चा क्षत्रिय होता है।

इतिहास बदलने की बात पर भी विवाद
अपने बयान में बेनीवाल ने यह भी कहा कि अगर किसी में साहस है, तो प्रधानमंत्री से कहो कि इतिहास को बदलें, अकबर का नाम हटाएं और नई किताबें शुरू करें। उन्होंने चेताया कि अगर उन्हें बार-बार निशाना बनाया गया, तो वे इतिहास के तथ्यों के साथ सामने आएंगे।

राजपूत समाज की तीखी प्रतिक्रिया
बेनीवाल के इस बयान के बाद राजपूत समाज में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। समाज के नेताओं का कहना है कि बप्पा रावल, महाराणा प्रताप, वीर दुर्गादास और महाराजा अजीत सिंह जैसे योद्धाओं ने राजस्थान की अस्मिता को बचाया है। ऐसे में इस प्रकार के बयान समस्त वीर समाज का अपमान हैं। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कहा है कि सांसद को ऐसी ओछी बात नहीं करनी चाहिए।

पूर्व बयान से भी भड़का विवाद
हाल ही में हनुमान बेनीवाल ने एक और टिप्पणी की थी जिसमें कहा गया था कि मुगलों के समय राजस्थान में सेटलमेंट होता था और लोग अपनी बेटियों के रिश्ते पहले ही दूर भेज देते थे। इस पर भी राजपूत समाज ने कड़ा विरोध जताया था। खांगटा ने तो यहां तक आरोप लगाया कि बेनीवाल ‘लाशों के सौदागर’ हैं जो समाजों में जहर घोलने का काम कर रहे हैं।

‘किसी एक समाज को टारगेट नहीं किया’ – बेनीवाल
बढ़ते विवाद के बीच बेनीवाल ने सफाई दी कि उन्होंने किसी एक समाज को निशाना नहीं बनाया है और उनका उद्देश्य केवल सामाजिक सच्चाई को उजागर करना था। उन्होंने कहा, ‘क्षत्रिय कोई शब्द नहीं, यह एक वर्ण है। जो लड़े वही क्षत्रिय है।’ राजनीतिक हलकों में यह बयान आगामी चुनावों से पहले जातिगत समीकरणों को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

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