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पहलगाम ‘अटैक टू नेशन थ्योरी’ का ट्रेलर, जम्मू-कश्मीर में लगे राष्ट्रपति शासन… पाक सेनाध्यक्ष का जिक्र कर ये क्या बोले शंकराचार्य

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अहमदाबाद:

पहलगाम आतंकी हमले के बाद द्वारका शारदापीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शसन की मांग की है। शनिवार को पहलगाम अटैक पर बोलते स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि जम्मू कश्मीर में जिस तरह से हिंदुओं को मारा गया। यह अभूतपूर्व घटना है। शंकराचार्य ने कहा इस घटना के बाद जम्मू कश्मीर का प्रशासन कठघरे में ऐसे में केंद्र सरकार कश्मीर को केंद्र सरकार पूरी तरह अपने हाथों में ले। जब तक स्थिति सामान्य न हो जाए तब तक राष्ट्रपति शासन लागू करे। शंकराचार्य ने कहा कि पहलगाम में जो हुआ वह टू नेशन थ्योरी का ट्रेलर है। उन्होंने कहा कि इस घटना के तीन दिन पूर्व पाकिस्तान सेनाप्रमुख आसिफ़ मुनीर ने पाकिस्तान में सार्वजनिक अपने भाषण में टू नेशन थ्योरी में जिस तरह की व्याख्या की थी उस व्याख्या का ही प्रैक्टिकल (प्रयोग) कश्मीर में दिखाई दिया।

शंकराचार्य ने लगाया बड़ा आरोप
शंकराचार्य ने कहा कि यह चिंता की बात है कि धर्मविशेष के लोगों को मारा जाए। यह इतना संवेदनशील प्रकरण है कि इससे सांप्रदायिक तनाव भी बढ सकता था और गृहयुद्ध की स्थिति बन सकती थी। उन्होंने कहा कि मैं सभी हिंदुओं से एकजुट होने की अपील करता हूं ताकि इस घटना का कड़ा जवाब दिया जा सके। शंकराचार्य ने कहा कि अभी तक हुई सभी घटनाओं में क्षेत्रीय संलिप्तता भी रही है किंतु कभी भी क्षेत्रीय प्रशासन ने केन्द्रीय शासन का सहयोग नहीं किया। कश्मीर प्रशासन कभी नहीं चाहता कि कश्मीर में हिंदू आबादी प्रवेश करे और ना ही पाकिस्तान चाहता है कि पाकिस्तान में हिंदू बढ़ें। अब समय आ गया है जबकि कश्मीर प्रशासन की जबाबदेही तय होनी चाहिए।

उमर अब्दुल्ला को निशाने पर लिया
शंकराचार्य ने बिना नाम लिए जम्मू कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला को निशाने पर लिया। शंकराचार्य ने कि जिस धारा 370 के विरुद्ध पूरा देश एकमत था। उस धारा 370 को पुनःलागू करवाने के मुद्दे पर नेशनल कॉफ्रेंस और कॉग्रेस गठबंधन ने पूर्ण बहुमत प्राप्त किया। इससे पता चलता है क्षेत्रीय लोगों को उकसा कर यह चुनाव जीता गया है। कश्मीर का वर्तमान चुनावी गठबंधन कश्मीर का विकास तो चाहता है पर हिन्दुओं के प्रवेश को नहीं चाहता। इस तरह पाकिस्तान और कश्मीर प्रशासन की इस समान विचारधारा से स्थिति गंभीर हो जाती है। देश की संप्रभुता की रक्षा करना जरूरी है। जब देश ही नहीं बचेगा तब संविधान का क्या औचित्य? इसलिए जब राष्ट्र के अस्तित्व की बात हो तब कूटनीति भी आवश्यक है।

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