अहमदाबाद
केंद्रीय चुनाव आयोगने हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों का ऐलान कर दिया। 2017 की तरह हिमाचल प्रदेश के चुनाव अलग होंगे। बीच में संभावना जताई गई थी, दोनों राज्यों चुनाव एक साथ हो सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हालांकि यह साफ हो गया है कि पिछली बार की तरह इस बार भी दोनों राज्यों के चुनाव परिणाम एक साथ आएंगे। इसका सीधा मतलब है कि 15वीं गुजरात विधानसभा चुनाव में किसकी सरकार बनेगी? यह 8 दिसंबर को साफ हो जाएगा। सुबह जब केंद्रीय चुनाव आयोग ने प्रेस कांफ्रेंस की सूचना दी तो अटकलें लगी कि क्या गुजरात चुनावोंका ऐलान होगा?
जानकारी के अनुसार गुजरात में चुनावों का ऐलान 22 अक्तूबर या फिर 29 अक्तूबर में किसी एक तारीख को हो सकता है। 22 अक्तूबर को धनतेरस है और 29 अक्तूबर को लाभ पाचम का पर्व है। लाभ पाचम के दिन से गुजरात में तमाम छोटे व्यापारी अपने कारोबार की फिर से शुरुआत करते हैं। मुहर्त करते हैं। गुजरात में पहले दौरे की वोटिंग 27 नवंबर या फिर 30 नवंबर को हो सकती है, जबकि दूसरे चरण के लिए 4-5 दिसंबर को वोट डाले जा सकते हैं। मतों की गणना हिमाचल प्रदेश के साथ 8 दिसंबर को होगी।
कुछ पहले आएंगे नतीजे
2017 में 14वीं विधानसभा के चुनाव भी दो चरणों में हुए थे। पहले चरण के लिए तब 9 दिसंबर और दूसरे के लिए 14 दिसंबर को वोट डाले गए थे। 18 दिसंबर को आए चुनाव परिणामों में बीजेपी को 99 सीटें मिली थीं जबकि कांग्रेस ने 77 सीटें मिली थी। दो सीटों पर बीटीपी (भारतीय ट्राइबल पार्टी) और एक सीट पर एनसीपी के उम्मीदवार को जीत मिली थी। तीन अन्य सीटें निर्दलीय को मिलीं थी। दलित नेता जिग्नेन मेवाणी वडगाम से कांग्रेस के समर्थन से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।
16 सीटें ऊपर-नीचे हुई थीं
2017 के चुनाव में मतदाताओं का जोश देखने को नहीं मिला था। 69.1 फीसदी वोटरों ने मताधिकार का प्रयोग किया था। इन चुनावों में 30,015,920 वोट पड़े थे। 2017 के चुनाव में बीजेपी की 16 सीटें घटी थीं तो कांग्रेस की 16 सीटें बढ़ी थीं। बीजेपी को 49.05% वोट मिले थे तो वहीं कांग्रेस को 41.44% वोट मिले थे। इन चुनावों में बीजेपी अपना गढ़ बचा पाने में सफल रही थी। उसे बहुमत के लिए जरूरी 92 सीटों से सिर्फ 7 सीटें अधिक मिल पाई थीं। नतीजों के बाद फिर विजय रुपाणी (Vijay Rupani) प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। वर्तमान में भूपेन्द्र पटेल (Bhupendra Patel) राज्य के मुख्यमंत्री हैं। बीजेपी ने पिछले साल सिंतबर में उन्हें राज्य की कमान सौंपी थी।
