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Thursday, May 7, 2026
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क्या बीएमसी चुनाव में बसेंगे टूटे ‘घर’, पार्टी तोड़ने वाले वाले भाई-भतीजे दिखाएंगे, हम साथ-साथ हैं

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मुंबई

बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा ट्विस्ट आ सकता है। महायुति और महा विकास अघाड़ी के समीकरण में उलटफेर होने की संभावना भी बन रही है। मुलाकातों और पर्दे के पीछे जारी बातचीत से यह उम्मीद जताई जा रही है कि महाराष्ट्र निकाय चुनाव से पहले रूठे फिर मानेंगे और खून के रिश्ते फिर से करीब आएंगे। बताया जा रहा है कि एनसीपी नेता अजित पवार फिर से चाचा शरद पवार के साथ आ सकते हैं। 20 साल पहले चाचा बाल ठाकरे के पुत्रमोह से दुखी होकर मनसे पार्टी बनाने वाले राज ठाकरे भी चचेरे भाई उद्धव के साथ गठबंधन के लिए तैयार हैं। सूत्रों के अनुसार, राज ठाकरे ने अपने विकल्प खुले रखे हैं और वह एकनाथ शिंदे के संपर्क भी हैं। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को चुप रहने की सलाह दी है।

बीजेपी की एक चाल से बदला माहौल
पिछले पांच साल में मुंबई में राजनीतिक उलटफेर हुए और नई पार्टियों के साथ नए गठबंधन का दौर शुरू हुआ। विधानसभा चुनाव में महायुति की प्रचंड जीत के बाद कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार) और शिवसेना (यूबीटी) बैकफुट पर चली गई। महाविकास अघाड़ी में कानाफूसी शुरू हो गई। एकनाथ शिंदे और अजित पवार बड़े गेमचेंजर बनकर उभरे। बीजेपी पहले से ज्यादा पावरफुल हो गई। राज ठाकरे एक बार फिर अपनी पार्टी के अस्तित्व के जूझते नजर आए। विधानसभा चुनाव जीतते ही बीजेपी ने अजित पवार और एकनाथ शिंदे को झटका देते हुए एक बड़ा खेल कर दिया। देवेंद्र फडणवीस ने निकाय चुनाव और बीएमसी चुनाव में गठबंधन की जिम्मेदारी जिले के नेताओं को दे दी। उन्होंने तय कर दिया कि निकाय चुनाव बीजेपी अकेले लड़ेगी।

एकनाथ शिंदे भी चाहते हैं राज ठाकरे का साथ
दूसरी ओर, महाविकास अघाड़ी में भी उद्धव सेना ने कांग्रेस और शरद पवार के अलग हटकर बीएमसी चुनाव लड़ने के सुर उठने लगे। यूबीटी सांसद संजय राउत ने भी कहा था पार्टी कार्यकर्ताओं की मांग है कि शिवसेना को बीएमसी चुनाव अपने दम पर लड़ना चाहिए। कांग्रेस और एनसीपी (एसपी) भी अकेले रह गई। अलग-अलग चुनाव लड़ने के ऐलान ने नए गठबंधन बनाने का रास्ता साफ कर दिया। अब एकनाथ शिंदे मुंबई और ठाणे जैसे इलाकों में उद्धव सेना से मुकाबले के लिए नए साथी की तलाश में जुट गए। उनकी नजर भी राज ठाकरे पर टिकी है। अगर शिंदे और राज ठाकरे एकसाथ चुनाव लड़ते हैं तो असली-नकली शिवसेना के नैरेटिव को नया ट्विस्ट मिल सकता है। दोनों नेता उद्धव ठाकरे के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए काफी हैं। वह गठबंधन के मुद्दे पर राज ठाकरे से मुलाकात कर चुके हैं।

बीजेपी से मुकाबले के लिए उद्धव आजमाएंगे सारे दांव
मुंबई में बीएमसी आखिरी किला बचाने के लिए उद्धव ठाकरे अपने तरकश से सारे तीर आजमाने को तैयार हैं। राज ठाकरे ने भी बीएमसी चुनाव से पहले अग्रेसिव मोड में मराठी भाषा को लेकर अपना ट्रडिशनल फॉर्मूला आजमाना शुरू कर दिया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना भी अपने पुराने पिच पर फील्डिंग जमा रही है, जहां उद्धव ठाकरे लगातार बैटिंग करते रहे। विधानसभा चुनाव में इस ग्राउंड पर बीजेपी और शिंदे की शिवसेना ने उद्धव की तगड़ी पटखनी दी। एक्सपर्ट मानते हैं कि 227 सीटों वाले बीएमसी पर अकेले कब्जा करना किसी एक पार्टी के लिए मुमकिन नहीं है। बीजेपी चुनाव के बाद बीएमसी में अपने पार्टनर का चुनाव करने के मूड में है। वह मुकाबले को वन टु वन के बजाय मल्टी कॉर्नर वाला बनाना चाहती है। बीजेपी के साथ आरएसएस के 35 अनुषांगिक संगठन चुनाव में काम करने को तैयार है। ऐसी स्थिति में चुनौती शिवसेना और एनसीपी के दोनों धड़ों के लिए है।

चाचा के साथ अजित पवार की गुप्त मीटिंग भी जारी
इस सियासी खेल के दो बड़े खिलाड़ी शरद पवार और अजित पवार भी अलग लेवल पर राजनीति कर रहे हैं। अजित महायुति के साथ हैं, मगर शरद पवार के विरोधी नहीं हैं। जब भी मौका मिलता है, दोनों नेता बंद कमरे में चर्चा कर लेते हैं। पिछले दिनों भी अजित पवार और शरद पवार की पुणे के सांखर सांकुल के कार्यक्रम के बाद बंद कमरे में मीटिंग हुई। पिछले तीन सप्ताह में तीसरी बार एकसाथ नजर आए। सांसद सुप्रिया सुले ने भी कहा कि वह अजित दादा और शरद पवार के फैसले को मंजूर करेगी। सवाल यह है कि चाचा-भतीजा किस फैसले के लिए गुप्त मीटिंग कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि एनसीपी के दोनों नेता निकाय चुनाव में विदर्भ और मराठवाड़ा में कब्जा करना चाहते हैं। महाराष्ट्र में बीएमसी समेत 29 नगर निगमों में मॉनसून के बाद अक्टूबर-नवंबर में चुनाव होने की संभावना है। सूत्र बताते हैं कि चाचा-भतीजे की पार्टियों का विलय होने की संभावना कम है, मगर सीटों पर कैंडिडेट तालमेट से उतारे जा सकते हैं।

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