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सूरत के सबसे दौलतमंद आदमी, करोड़ों का साम्राज्‍य, फिर बेटे को क्‍यों करनी पड़ी 200 रुपये दिहाड़ी पर नौकरी?

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नई दिल्‍ली:

सूरत के रहने वाले सावजी धनजी ढोलकिया बड़े हीरा व्यापारी हैं। अपनी कंपनी के कर्मचारियों को दिवाली पर कार, फ्लैट और एफडी जैसे शानदार तोहफे देने के लिए जाने जाते हैं। सावजी धनजी हरि कृष्णा एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और अध्यक्ष हैं। यह देश की सबसे बड़ी हीरा निर्माण और निर्यात करने वाली कंपनियों में से एक है। सावजी ने 1992 में अपने तीन भाइयों के साथ मिलकर इस कंपनी की शुरुआत की थी। हीरा व्यवसाय में कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद हरि कृष्णा एक्सपोर्ट्स ने जिस तरह से सफलता हासिल की है वह काबिले तारीफ है। अपनी सफलता के बावजूद सावजी धनजी एक साधारण जीवन जीना पसंद करते हैं। यही बात उन्‍होंने अपने बच्‍चों को सिखाई है। उन्‍होंने बेटे द्रव्‍य को जिंदगी की कठिनाइयों का सामना करने के लिए अपने से दूर भेजा था। नाम तक का इस्‍तेमाल न करने को कहा था। एक समय बेटे ने 200 रुपये की दिहाड़ी पर काम किया। आइए, यहां सावजी ढोलकिया और बेटे से जुड़ी उनकी पूरी कहानी के बारे में जानते हैं।

सावजी धनजी ढोलकिया का जन्म 12 अप्रैल, 1962 को गुजरात के अमरेली जिले के दुधला गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। उनके तीन भाई हैं – तुलसी, हिम्मत और घनश्याम। पारिवारिक आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण सावजी सिर्फ चौथी कक्षा तक ही पढ़ पाए। 14 साल की उम्र में ही उन्होंने स्कूल छोड़ दिया। सावजी धनजी ने अपने चाचा के हीरा व्यवसाय में काम करना शुरू कर दिया। बाद में उनके भाई हिम्मत और तुलसी भी चाचा की कंपनी में शामिल हो गए। यहां उन्होंने हीरा व्यवसाय, निर्माण और बिक्री के बारे में बहुत कुछ सीखा।

1992 में खुद की कंपनी शुरू की
साल 1992 में सावजी धनजी और उनके तीनों भाइयों ने मिलकर अपनी खुद की हीरा निर्माण कंपनी हरि कृष्णा एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की। कंपनी की हीरा-कटिंग और पॉलिशिंग इकाई सूरत में और निर्यात कार्यालय मुंबई में खोला गया। 2014 तक वे हीरा निर्माण क्षेत्र में एक बड़ा नाम बन चुके थे। उनके पास 6500 कर्मचारियों की टीम थी।

सावजी धनजी अपनी दूरदर्शिता के लिए जाने जाते हैं। इसका अंदाजा 2005 में तब लगा जब उन्होंने अपनी कंपनी हरि कृष्णा एक्सपोर्ट्स के तहत KISNA नाम से एक आभूषण ब्रांड लॉन्च किया। आज, यह भारत का सबसे बड़ा हीरा आभूषण ब्रांड है। इसके भारत के विभिन्न शहरों में 6,250 से अधिक आउटलेट हैं।

एक तरफ जहां घरेलू व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा था, वहीं दूसरी ओर 2003-2004 के आसपास हीरे के निर्यात में अचानक हुई बढ़ोतरी ने उनके मुनाफे को आसमान पर पहुंचा दिया। इसने हरि कृष्णा को हीरा क्षेत्र का एक प्रमुख खिलाड़ी बना दिया। आज, हरि कृष्णा एक्सपोर्ट्स 79 विभिन्न देशों को हीरे का निर्यात कर रही है। उसकी मासिक निर्माण क्षमता की बात करें तो यह हर महीने 40,000 कैरेट हीरे का उत्पादन करती है।

सावजी धनजी ढोलकिया का विवाह गौरीबेन से हुआ है। दंपति शायद ही कभी सार्वजनिक रूप से दिखाई देते हैं क्योंकि वे अपना निजी जीवन निजी रखना पसंद करते हैं। सावजी और गौरीबेन के चार बच्चे हैं – मेना, निमिषा, द्रव्य और किसना।

बेटे को इसल‍िए नौकरी करने को भेजा
ढोलकिया परिवार में एक परंपरा है जो 12 साल पहले शुरू हुई थी। उस समय पूरा परिवार लंदन के एक होटल में रात का खाना खा रहा था। अनजाने में उनका बिल बहुत ज्‍यादा आ गया। इसके बाद उन्होंने खुद को पैसे की अहमियत का एहसास कराने के लिए एक महीने तक जीवन की कठिनाइयों का अनुभव करने का फैसला किया। समय के साथ यह एक परंपरा बन गई। जब सावजी धनजी और उनके भाइयों के बच्चे हुए तो उन्होंने उन्हें भी यही सबक सिखाया।

सावजी धनजी ढोलकिया ने अपने बेटे द्रव्य को भी जीवन की कठिनाइयों का सामना करने भेजा। उन्होंने द्रव्य को अपना नाम इस्तेमाल करने से भी मना किया था। नतीजतन, द्रव्य ने एक जूते की दुकान, मैकडॉनल्ड्स के आउटलेट और यहां तक कि एक कॉल सेंटर में भी काम किया। एक समय ऐसा भी आया जब द्रव्य 40 रुपये का खाना भी अफोर्ड नहीं कर सकते थे। लेकिन जल्द ही, उन्होंने कठिनाइयों को अपना लिया और जीवन के वो सबक सीख लिए जो उनके पिता उन्हें सिखाना चाहते थे।

सावजी धनजी के बेटे द्रव्य ढोलकिया को एक होटल में अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी मिल गई, जहां उन्होंने बेकरी विभाग में काम किया। पैसे और संघर्ष के जरूरी पहलुओं को सीखने के बाद फिलहाल वह अपने पिता के साथ काम कर रहे हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, सावजी धनजी की कुल संपत्ति 12,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। वर्षों की कड़ी मेहनत और निरंतरता के साथ सावजी ने यह विशाल संपत्ति अर्जित की है। इसमें कोई शक नहीं कि वह वास्तव में यह सब डिजर्व करते हैं। एक किसान के बेटे से सूरत के सबसे अमीर आदमी बनने तक का उनका सफर आसान नहीं था।

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