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Thursday, March 12, 2026
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ममता को उनकी की भाषा में जवाब देने के लिए BJP ने मिशन बंगाल भेजी अपनी ‘त्रिमूर्ति’

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कोलकाता

लोकसभा चुनाव 2024 को देखते हुए मिशन बंगाल को फतह करने के लिए बीजेपी ने तैयारी अभी से ही शुरू कर दी है। पार्टी ने अपने तीन शीर्ष नेताओं को इसके लिए नियुक्त किया है। इनमें केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान , स्मृति ईरानी और ज्योतिरादित्य सिंधिया को ममता का किला भेदने के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई है। बीजेपी चाहती है कि साल 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी ने पश्चिम बंगाल में 42 में से 18 संसदीय सीटों के साथ जो जमीन हासिल की, उससे आगे कैसे बढ़ा जाए।

दरअसल बीजेपी की इतनी तैयारियों के बावजूद भी ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने विधानसभा चुनावों में शानदार जीत दर्ज की थी। लेकिन शिक्षक भर्ती घोटाले के बाद फिलहाल माहौल ममता सरकार और कमोवेश उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लिए सही नहीं है। घोटाले को लेकर सवालों से घिरी ममता सरकार को मंत्रियों की बर्खास्तगी से लेकर नई कैबिनेट विस्तार तक करना पड़ा था। बीजेपी इसी का फायदा उठाना चाहती है और समय की महत्ता को ध्यान में रखते हुए अपने पक्ष में जनता को लाना चाहती है, जिससे कि आने वाले लोकसभा चुनाव की जमीन को तैयार किया जा सके।

धर्मेंद्र प्रधान और सुवेंदु अधिकारी की जोड़ी दिखाएगी कमाल
बंगाल में फिर से जमीन हासिल करने की सोंच के साथ बीजेपी लगातार अपनी योजना बना रही है। इसको देखते हुए धर्मेंद्र प्रधान को राज्य में पार्टी के विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के साथ अच्छे कामकाजी संबंध के लिए जाना जाता है। जिसको देखते हुए उन्हें राज्य के सभी 42 संसदीय क्षेत्रों की निगरानी का प्रभार दिया गया है। प्रधान सक्रिय रूप से अधिकारी के साथ काम कर रहे थे। सुवेंदु अधिकारी फिलहाल विपक्ष के नेता है। उन्होंने टीएमसी छोड़ दी थी और 2021 में भी नंदीग्राम में मुख्यमंत्री ममता को शिकस्त दी थी।

दो मंत्रियों को बोलनी आती है बांग्ला, मिलेगा क्षेत्रीय फायदा
मिशन बंगाल को फतह करने में जुटी बीजेपी ने तीन में से दो ऐसे केंद्रीय मंत्रियों की तैनाती की है, जिन्हे बांग्ला भाषा बोलना भी आता है। दरअसल प्रधान और ईरानी दोनों ही बांग्ला बोल लेते हैं, जिससे इन्हें स्थानीय स्तर पर काम करने के लिए एक अतिरिक्त लाभ मिलेगा। सिंधिया को अब तक राज्य के सबसे बड़े निर्वाचन क्षेत्रों में से एक दमदम पर गौर करने के लिए कहा गया है। हालांकि यहां पर अनुभवी सांसद सौगत रॉय द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाता है, लेकिन उन्हें अपने प्रभार के तहत आसपास की सीटें भी मिल सकती हैं।

महिला वोट बैंक को पाले में लाएंगी स्मृति!
बीजेपी के अंदर स्मृति ईरानी को इस तौर पर देखा जाता रहा है कि महिलाओं को रिझाने की कला उनके अंदर बखूबी है। बंगाल में भी पार्टी स्मृति की इस परफॉर्मेंस को जारी रखना चाहती है। इसको देखते हुए स्मृति ईरानी उन सीटों पर तैनात किए जाने की संभावना है, जहां महिला मतदाता एक प्रमुख कारक हैं और साथ ही साथ एक बड़ा वोट फैक्टर है। दरअसल महिलाओं ने 2021 में ‘दीदी’ (बनर्जी) के नेतृत्व वाली टीएमसी के लिए बड़े पैमाने पर मतदान किया था। इसलिए बीजेपी चाहती है कि स्मृति ईरानी ऐसे वोटों में सेंधमारी करने में कामयाब रहती हैं तो पार्टी को इसका बड़ा फायदा मिल सकता है।

ममता बनर्जी और पीएम मोदी की मुलाकात को लेकर न बदलें नजरिया
हाल ही में दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ ममता बनर्जी ने मुलाकात की थी। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगी थीं। इसके पीछे की वजह यह कि ममता ने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई थी और न ही कोई विरोध दर्ज किया था। इस मुलाकात का संदेश राज्य की पार्टी इकाई में गलत न जाए और कार्यकर्ता किसी तरह से ढीले न पड़ें। भाजपा नेतृत्व ने अपनी राज्य पार्टी इकाई को टीएमसी और भाजपा के बीच कथित “सौदे” जैसी बातों को सिरे से खारिज करने का निर्देश दिया है। दरअसल पार्टी के सूत्रों के अनुसार बीजेपी का फोकस ‘मिशन बंगाल’ को फतह करने की योजना है। .

शुवेंदु अधिकारी को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले के बाद बंगाल बीजेपी अपने गढ़ को मजबूत करने में तेजी से जुटी है। माना जा रहा है कि बंगाल में यह घोटाला उजागर होने के बाद लोगों में सरकार को लेकर खासा उबाल है, इसी मौके का फायदा बीजेपी लेना चाह रही है। जिसको देखते हुए केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर बंगाल बीजेपी के आला नेताओं को बैठक के लिए दिल्ली बुलाया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक यह बैठक कोलकाता में 11 अगस्त को हो सकती है। चूंकि बीजेपी की ओर से शुवेंदु अधिकारी एक बड़ा चेहरा माने जाते हैं। इसलिए हो सकता है कि पार्टी उन्हें प्रदेश अध्यक्ष भी बना दे। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति बनने के बाद राज्य सरकार पर केंद्र के दबाव को अब विभिन्न चैनलों के माध्यम से बढ़ाना होगा। वहीं पार्टी में राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा जैसे अन्य लोगों के भी बाद में शामिल होने की उम्मीद है।

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