वाराणसी
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के लॉ फैकेल्टी के एक छात्र ने देर रात अपने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी। पहले छात्र ने अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर good bye to all of you लिखा और उसके कुछ देर बाद ही अपने रूम में फांसी पर लटका पाया गया। देर रात 12:37 बजे यह स्टेटस लगाया गया था। रात में डेढ़ बजे दिल्ली (Delhi) के साथी छात्रों ने स्टेटस देख कर विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय पुलिस को सूचना दी। सूचना देने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और आगे की विधिक कार्रवाई शुरू की। साथ ही परिजनों को सूचना देकर बुलवाया गया।
मृतक मूल रूप से बिहार के आरा का रहने वाला था। दिल्ली में साथ के पढ़े छात्रों ने मृतक के मोबाइल कॉल रिकॉर्डिंग और व्हाट्सअप चैट के जांच की मांग की। साथी छात्रों ने ये भी बताया कि मृतक बीते पांच साल से एक रिलेशनशिप में था और संभवतः किसी बात को लेकर तनाव में था। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के लॉ फैकेल्टी में एलएलएम कर रहे प्रेमशंकर खरवार ने बीती रात बीआर अंबेडकर हॉस्टल के रूम नंबर 57 में फांसी लगा ली। मृतक छात्र दिल्ली के रामजस कॉलेज से फिजिक्स में ग्रेजुएट था। इसके बाद उसने दिल्ली के ही कैंपस फॉर लॉ सेंटर से एलएलबी (LLB) किया था। साथी छात्र विकास पटेल ने बताया कि मृतक प्रेमशंकर बहुत ही कॉन्फिडेंट लड़का था। आत्महत्या जैसा कदम उसने क्यों उठाया इस बात की जांच होनी चाहिए। कई साल से वो एक रिलेशनशिप में था और बीते कुछ दिनों से परेशान भी था।
रात में स्टेटस देख के पुलिस को दी सूचना
विकास पटेल ने बताया कि प्रेम शंकर ने अपने व्हाट्सअप पर रात के 12:37 पर स्टेटस लगाया। स्टेटस में लिखा था “good bye all of you. Sorry to say” रात में एक बजे मैंने और कुछ दोस्त ने स्टेटस देखा तो कॉल लगाना शुरू किया, लेकिन प्रेम शंकर ने फोन नहीं उठाया। अनहोनी की आशंका के चलते हम लोगों ने तत्काल विभाग के डीन को कॉल लगाया, लेकिन उनका फोन नहीं उठा। फिर नेट से स्थानीय थाने पर हमने फोन किया और कहा कि एक बार हॉस्टल में तस्दीक कर लें तो हम से ही पूछा जाने लगा कि आपको कैसे पता चला। मामला समझाने के बाद करीब दो बजे स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची।
पिता को बोला था सब ठीक है, डेढ़ बजे लगा ली फांसी
प्रेम शंकर के पिता भरत राम बेहद बुजुर्ग है। पुलिस की सूचना पर वो सुबह परिसर में पहुंचे। उन्होंने बताया कि रात में दस बजे मेरी बेटे प्रेम शंकर से बात हुई थी। बातचीत में उसने बतया था कि बाबुजी सब ठीक है। लेकिन ना जाने ऐसी कौन सी बात थी कि उसने जान दे दी।
