अहमदाबाद
गुजरात हाई कोर्ट मोरबी पुल हादसे पर स्वत: संज्ञान ली गई जनहित याचिका पर कल यानी 14 नवंबर को सुनवाई कर सकता है। मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ की अनुपलब्धता के कारण सोमवार को इस मामले पर सुनवाई नहीं हो सकी। मुख्य न्यायाधीश कुमार और न्यायमूर्ति आशुतोष शास्त्री की पीठ ने 30 अक्टूबर को हुए हादसे पर सात नवंबर को राज्य सरकार और राज्य मानवाधिकार आयोग को नोटिस जारी करने के साथ सरकार से स्थिति रिपोर्ट मांगी थी।
हाई कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, मामले की अगली सुनवाई 15 नवंबर को होगी। मोरबी में 30 अक्टूबर को मच्छु नदी पर ब्रिटिश काल में बने केबल पुल के गिरने से महिलाओं और बच्चों सहित 135 लोगों की मौत हो गई थी। हाई कोर्ट ने सात नवंबर को कहा कि उसने पुल गिरने की घटना पर एक समाचार रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया है और इसे एक जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा था, ”प्रतिवादी एक और दो (मुख्य सचिव और गृह सचिव) अगले सोमवार तक एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करेंगे। राज्य मानवाधिकार आयोग इस संबंध में सुनवाई की अगली तारीख तक रिपोर्ट दाखिल करेगा।” पुलिस ने मोरबी पुल का प्रबंधन करने वाले ओरेवा समूह के चार लोगों सहित नौ लोगों को 31 अक्टूबर को गिरफ्तार किया, और पुल के रखरखाव और संचालन का काम करने वाली कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
मच्छु नदी पर बने इस केबल पुल की मरम्मत का ठेका ओरेवा ग्रुप को दिया गया था। पुल टूटने के बाद ये कंपनी जांच के घेरे में आ गई है। आपको ये जानकर बहुत हैरानी होगी कि जिस ओरेवा ग्रुप को केबल पुल की मरम्मत की जिम्मेदारी दी गई थी उस कंपनी को पुल की मरम्मत का कोई अनुभव ही नहीं था। ओरेवा ग्रुप को बस सीएफएल बल्ब, दीवार घड़ी और ई-बाइक बनाने में विशेषज्ञता हासिल है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि ओरेवा ग्रुप को 100 साल से भी अधिक पुराने पुल की मरम्मत का ठेका कैसे मिल गया? गुजरात के मोरबी शहर में मच्छु नदी पर केबल पुल हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर सोमवार को 134 हो गई है।
