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एक ही अकाउंट में 31 बार आई मुआवजे की राशि, क्लर्क ने मौत के फर्जी आंकड़े देकर 11.2 करोड़ हड़पे

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सिवनी

पुलिस सिवनी में एक सरकारी क्लर्क की तलाश कर रही है, जिसने कथित तौर पर काल्पनिक मृत लोगों के नाम पर फाइलें तैयार कीं और कोविड के दौरान मुआवजे के भुगतान में लगभग 11.2 करोड़ रुपये की हेराफेरी की है। अधिकारियों ने संदिग्ध क्लर्क का नाम सचिन दहयात बताया है, जो सिवनी से 55 किमी दूर केवलारी कस्बे में तहसील ऑफिस के लेखा अनुभाग में तैनात था। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए केवलारी तहसीलदार हरीश लालवानी ने बताया कि सचिन को छह साल पहले अपने पिता की मौत के बाद अनुकंपा पर नौकरी मिली थी।

मामले की जांच कर रही पुलिस के अनुसार सचिन ने 279 मौतों में फर्जीवाड़ा किया है। कोविड से मौत की स्थिति में हर केस में चार लाख रुपये का मुआवजा मिलता था। मुआवजे की राशि उसने अपने 40 रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर करवाए हैं। पुलिस ने कहा कि आरोपी क्लर्क ने कोविड के पहले लॉकडाउन के दौरान यह अप्राकृतिक मौत राहत घोटाला शुरू किया था। दरअसल, एमपी में बिजली गिरने, सर्पदंश, डूबने या ऐसे ही अन्य कारणों से मरने वाले गरीब और भूमिहीन व्यक्तियों के परिवारों को चार लाख रुपये की सहायता दी जाती है। इसने पहला फर्जी लेनदेन 27 मार्च 2020 को किया था।

ऐसे मामलों में फील्ड रेवन्यू स्टॉफ मुआवजे के लिए अप्राकृतिक मौतों का दस्तावेजीकरण करता है। इसके बाद अधिकारी इसे सत्यापित करते हैं। यह पता लगाया जाता है कि व्यक्ति और उसकी मौत कानून के दायरे में आता है यनहीं। यदि सब कुछ सही पाया जाता है तो परिजनों और उनके खाता संख्या के विवरण के साथ मुआवजे का एक आदेश सरकारी पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाता है। इसके बाद पैसा उनके खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

आरोपियों ने केवल काल्पनिक व्यक्तियों के नाम पर फर्जी आदेश बनाए। इनके नाम से न कोई फाइल रखी और न ही कोई केस किया गया। तहसीलदार लालवानी ने कहा कि मुआवजे की राशि के लिए उसने अपने ही लोगों के अकाउंट नंबर दिए। सिवनी एसपी रामजी श्रीवास्तव ने कहा कि सचिन जानता था कि वह अधिक समय तक इस खेल को नहीं चला सकता और गायब हो गया। एसपी ने कहा कि आरोपी अपने खिलाफ मामला दर्ज होने के पहले से ही गायब है।

तहसीलदार ने बताया कि 14 नवंबर को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। मामला तब सामने आया जब ऑडिट दल की टीम यहां पहुंची। इस दौरान आरोपी कहीं नहीं मिला। जब उसकी आलमारी की जांच की गई तो उसने जो मुआवजे की राशि के लिए दस्तावेज अपलोड किए थे, उसकी फाइल कही नहीं मिली। हर रेकॉर्ड की जांच की गई और यह पाया गया कि 27 मार्च 2020 से 279 ऐसे लेनदने किए गए थे।

एक खाते में 31 बार गई राशि
यही नहीं आरोपी ने सरकारी राशि के लिए 40 खातों का उपयोग किया है। इसमें से एक खाते का उपयोग 31 बार किया गया है। तहसीलदार ने कहा कि हमारे अनुमान के अनुसार 11.16 करोड़ रुपये की गलत निकासी हुई है। सिवनी एसपी ने कहा कि हम विस्तृत जांच कर रहे हैं। उन सभी खातों के बैंक स्टेटमेंट का अध्ययन किया जा रहा है, जहां यह पैसा ट्रांसफर किया गया था। हमने कई लोगों से ब्योरा मांगा है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर मामले में और भी आरोपी हो सकती हैं।

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