भोपाल। राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। कभी शहर की सड़कों पर शान से दौड़ने वाली BCLL की 350 बसों का बेड़ा अब सिमटकर महज 50 बसों तक पहुंच गया है। हालत यह है कि जो मुट्ठी भर बसें सड़कों पर हैं, वे भी दम तोड़ रही हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने नगर निगम के दावों की पोल खोल दी है, जिसमें यात्री खुद बस से उतरकर उसे धक्का लगाते नजर आ रहे हैं। यह घटना राजधानी की बदहाल बस सेवा का जीता-जागता प्रमाण बन गई है।
बसों की भारी कमी का सीधा असर शहर के प्रमुख व्यस्ततम इलाकों जैसे बोर्ड ऑफिस, न्यू मार्केट और रेलवे स्टेशन पर देखने को मिल रहा है। यहां यात्रियों की लंबी कतारें घंटों तक बसों का इंतजार करती नजर आती हैं। कई रूट्स पर तो अंतराल एक घंटे से भी अधिक हो गया है। भीषण गर्मी के इस मौसम में यात्रियों के लिए सफर किसी सजा से कम नहीं है। बसों के भीतर टूटी हुई सीटें, बंद खिड़कियां और तपते लोहे-फाइबर के बीच यात्री पसीने से तर-बतर होने को मजबूर हैं। वहीं, बस स्टॉप्स पर भी छाया और ठंडे पानी का कोई इंतजाम नहीं है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों की परेशानी और बढ़ गई है।
परिवहन व्यवस्था की इस विफलता का फायदा निजी ऑटो चालक जमकर उठा रहे हैं। बस न मिलने की मजबूरी का लाभ उठाते हुए ऑटो चालक यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि बसों का समय पर मेंटेनेंस नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण करोड़ों की संपत्ति कबाड़ में तब्दील हो रही है। यदि जल्द ही नई बसें सड़क पर नहीं उतरीं और मौजूदा व्यवस्था को नहीं सुधारा गया, तो राजधानी की यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है।
