मुंबई
महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के विवादित बयान के बाद अब महाराष्ट्र बीजेपी (BJP) में दो गुट नजर आ रहे हैं। एक तरफ जहां राज्यपाल के विवादित बयान को देवेंद्र फडणवीस का समर्थन मिला है तो वहीं दूसरी तरफ चंद्रशेखर बावनकुले ने गवर्नर के बयान पर आपत्ति जताई है। बावनकुले ने कहा कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को शिवाजी महाराज की तुलना किसी राजनेता के साथ नहीं करनी चाहिए थी। महाराष्ट्र की जनता शिवाजी महाराज को भगवान की तरह पूजती है। जबकि देवेंद्र फडणवीस ने कोश्यारी के बयान के विषय में कहा था कि राज्यपाल के बयान का गलत मतलब निकाला गया है। महाराष्ट्र बीजेपी के इन दो नेताओं के बयान के बाद ऐसा लग रहा है कि राज्यपाल के मुद्दे पर पार्टी दो धड़ों में बंटी हुई है।
बीजेपी इस समय दो बयानों की वजह से बैकफुट पर हैं पहला बयान महामहिम राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी द्वारा दिया गया था। जिसमें उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज को पुराने जमाने का हीरो बताया था। वहीं दूसरे बयान में बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने यह कहा था कि शिवाजी महाराज ने पांच बार औरंगजेब को पत्र लिखकर माफी मांगी थी। कल तक वीर सावरकर के मुद्दे पर राहुल गांधी को निशाने पर ले रही है बीजेपी अब खुद बैकफुट पर नजर आ रही है। आलम यह है कि बीजेपी ही बीजेपी में ही राज्यपाल के विषय पर दो गुट बन चुके हैं।
एनसीपी नेता महेश तपासे ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र
एक तरफ महाराष्ट्र में राज्यपाल फिलहाल अपने विवादित बयान के बाद अलग-थलग पड़ गए हैं। दूसरी तरफ विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है। एनसीपी के प्रवक्ता महेश तपासे ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखकर मांग की है कि राज्यपाल के वक्तव्य से महाराष्ट्र का सामाजिक समीकरण बिगड़ रहा है। लोगों के मन में उनके प्रति काफी आक्रोश है। उन्होंने राष्ट्रपति से यह मांग भी की है की राज्यपाल को महाराष्ट्र की जगह किसी दूसरे राज्य में भेजा जाए। तपासे के पत्र में यह भी लिखा गया है कि राज्यपाल अक्सर विवादित बयान देकर सुर्खियां बटोरने की कोशिश में रहते हैं।
न सिर्फ एनसीपी बल्कि शिवसेना और कांग्रेस भी लगातार राज्यपाल और बीजेपी पर हमला बोल रहे हैं। उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को भी इस विवाद में लपेटा है। उन्होंने सवाल किया है कि हिंदुत्व की दुहाई देने वाले मुख्यमंत्री अब छत्रपति शिवाजी महाराज के अपमान पर खामोश क्यों हैं?
