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भारत से मात्र 55 किमी दूर बड़े खतरे की आहट! बंगाल की खाड़ी में जासूसी अड्डे का खुलासा, चीन से है कनेक्शन

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यंगून

भारत के लिए बंगाल की खाड़ी में बड़ा खतरा पैदा होने जा रहा है। म्‍यांमार अंडमान निकोबार द्वीप समूह से मात्र 55 किमी की दूरी पर स्थित कोको द्वीप समूह में सीक्रेट नौसैनिक जासूसी ठिकाना बना रहा है। म्‍यांमार ने यह कदम ऐसे समय पर उठाना शुरू किया है जब भारत ने चीन को घेरने के लिए अंडमान निकोबार समूह में तीनों ही सेनाओं की संयुक्‍त कमान का गठन किया है। म्‍यांमार इन दिनों विद्रोहियों के भीषण हमले से जूझ रहा है और उन्‍हें कुचलने के लिए चीन के साथ दोस्‍ती बढ़ा रहा है। चीन ने बड़े पैमाने पर हथियार और गोला- बारूद की मदद की है। इस बीच जनवरी में ली गई सैटलाइट तस्‍वीरों से खुलासा हुआ है कि म्‍यांमार की सैन्‍य सरकार बंगाल की खाड़ी में स्थित कोको द्वीप पर विशाल जासूसी बेस बना रही है।

सैटलाइट तस्‍वीरों से पता चल रहा है कि जल्‍द ही ग्रेट कोको द्वीप के पास नौसैनिक निगरानी अभियान शुरू कर सकता है। यह द्वीप भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से मात्र 55 किमी की दूरी पर है। चीन ने म्‍यांमार के रास्‍ते हिंद महासागर में घुसने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश शुरू किया है और वह अब अपने समुद्री जहाजों की मदद से सिंगापुर से सामान मंगाना तेज कर रहा है। चीन म्‍यांमार के बंदरगाह तक रेललाइन बनाने की तैयारी कर रहा है। इससे हिंद महासागर तक उसकी सीधी पहुंच हो जाएगी। इन सैटलाइट तस्‍वीरों को मैक्‍सर ने जारी किया है। इन तस्‍वीरों में ग्रेट कोको द्वीप पर तेजी से निर्माण कार्य नजर आ रहा है।

सैटलाइट तस्‍वीरों में नजर आ रहा है कि द्वीप पर दो नए हैंगर और रहने का स्‍थान बनाया जा रहा है। इसके अलावा इस द्वीप पर 2300 मीटर लंबा रनवे और रेडॉर स्‍टेशन बन गया है। यह नौसैनिक बेस मार्च महीने के अंत‍िम दिनों में साफ नजर आने लगा। म्‍यांमार में पिछले दो साल से गृहयुद्ध चल रहा है जिससे वहां की सैन्‍य सरकार अंतरराष्‍ट्रीय रूप से पूरी तरह से कट गई है। इस मौके का फायदा अब चीन उठा रहा है। चीन ने म्‍यांमार-चीन इकनॉम‍िक कॉरिडोर में बड़े पैमाने पर निवेश किया है ताकि वह हिंद महासागर तक पहुंच जाए। इससे उसे मलक्‍का स्‍ट्रेट से नहीं जाना होगा और वह अपने यूनान प्रांत तक आसानी से ऊर्जा पहुंचा सकेगा।

ब्रिटेन की बहुचर्चित संस्‍था चैथम हाउस की रिपोर्ट के मुताबिक इन ताजा साक्ष्‍यों से यह स्‍पष्‍ट होता जा रहा है कि म्‍यांमार में चीन का प्रभाव तेजी से बढ़ता ही जा रहा है। म्‍यांमार की सेना देश के एक बड़े हिस्‍से से अपना नियंत्रण गंवा चुकी है और अर्थव्‍यवस्‍था रसातल में पहुंच गई है। माना जा रहा है कि चीन की कंपनियां अब म्‍यांमार की जमीन पर काम कर रही है और वहां विशाल जहाजों के लिए बंदरगाह जैसे प्रॉजेक्‍ट बना रही हैं। वहीं सैन्‍य सरकार ने उनकी सुरक्षा के लिए कुछ सैनिक भी तैनात कर रखे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि म्‍यांमार अगर कोको द्वीप को नौसैनिक अड्डे में बदलता है तो यह भारत के लिए बहुत बड़ा खतरा बनने जा रहा है।

भारत की बढ़त को यूं खत्‍म कर देगा चीन
भारत हिंद महासागर में चीन के ऊपर लगाम लगाने के लिए अपने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में नौसैनिक तैयारी को बढ़ा रहा है। कोको द्वीप पर म्‍यांमार के बेस से भारत के लिए एक और बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा जो पहले ही चीन के खतरे से चौतरफा जूझ रहा है। इससे भारतीय नौसेना की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भारत अंडमान निकोबार द्वीप समूह के जरिए चीन को मलक्‍का स्‍ट्रेट में घेर सकता है लेकिन म्‍यांमार के इस कदम से भारत की इस रणनीतिक बढ़त पर संकट पैदा हो गया है। चीन के व्‍यवसायिक जहाज जल्‍द ही मलक्‍का स्‍ट्रेट को बायपास करते हुए सीधे म्‍यांमार में अपने सामान को उतार देंगे और भारत की बढ़त खत्‍म हो जाएगी। यही नहीं चीन अब आसानी से कोको द्वीप से भारत के युद्धपोतों पर नजर रख पाएगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अगर म्‍यांमार पर और ज्‍यादा दबाव डालता है तो वह भारत के खिलाफ खुफिया उड़ानों का डेटा हासिल कर सकता है। म्‍यांमार को इस समय पैसे की जरूरत है और चीन उसे जासूसी के बदले दे सकता है। इससे पहले भी कई बार ऐसी खबरें आई थीं कि इस द्वीप पर चीन ने जासूसी के लिए कई रेडॉर लगा रखे हैं। हालांकि इसकी स्‍वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी थी। इस द्वीप पर रनवे भी बना है जिससे यहां म्‍यांमार के फाइटर जेट भी उतर सकेंगे। ताजा तस्‍वीरों से खुलासा हुआ है कि इस द्वीप पर निर्माण कार्य को तेजी से किया जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस द्वीप का इस्‍तेमाल भविष्‍य में म्‍यांमार चीन से फायदा उठाने में कर सकता है। म्‍यांमार इस द्वीप के जरिए भारत की आसानी से जासूसी कर सकेगा और चीन उसका लाभ उठा सकता है।

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