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बंगाल में BJP नहीं साध पाई हिंदू वोट, मुस्लिमों ने किया ममता की TMC से किनारा! पूरा माजरा क्या है

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कोलकाता

पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव नतीजों ने BJP की टेंशन बढ़ा दी है। 2019 लोकसभा चुनाव के मुकाबले बीजेपी को मिला वोट प्रतिशत करीब आधा रह गया। बीजेपी को पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी को 40 फीसदी वोट मिले थे, जोकि पंचायत चुनावों में गिरकर 23 फीसदी पर आ गए। वहीं ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी की बात करें तो जीत के बाद भी आंकड़े राहत देने वाले कतई नहीं हैं। ममता बनर्जी के लिए चिंता की बात यह है कि जो मुस्लिम वोट टीएमसी को एकतरफा मिलता था वो दूसरी पार्टी के पाले में जा गिरा है। हाल ही में बनी पार्टी इंडियन सेकुलर फ्रंट ने मुस्लिम वोटों को अपनी ओर शिफ्ट कर ममता दीदी की नींद उड़ा दी है। कुल मिलाकर कहें तो यह आंकड़े कहीं न कहीं आने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी और टीएमसी दोनों पर इफेक्ट डाल सकते हैं।

टीएमसी को पंचायत चुनाव में मिली रेकॉर्ड जीत
पंचायत चुनाव में TMC को रिकॉर्ड जीत मिली है। लेकिन वोटों की शिफ्टिंग लोकसभा चुनाव में फर्क डाल सकती है। इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। वहीं बीजेपी को 2018 के पंचायत चुनाव के मुकाबले इस बार के चुनाव में ज्यादा सीटें मिली हैं। हालांकि, इसे लोकसभा और विधानसभा के वोट शेयर से देखा जाए तो यह चिंताजनक मालूम पड़ता है।

आंकड़ों से समझिए पूरा हिसाब

पार्टी ग्राम पंचायत पंचायत समिति जिला परिषद
टीएमसी 66 % 79 % 95 %
बीजेपी 18.24 % 12.25 % 26 %
कांग्रेस 4.82 % 3.2 % 12
लेफ्ट 5.8 % 2.3 % 2

कैसे मुस्लिमों को TMC से दूर कर ले गई ISF
सीएम ममता और बीजेपी के छत्तीस आंकड़े के बीच इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) की एंट्री ने बंगाल की सियासत में खासा फर्क डाल दिया है। आईएसएफ ने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर मुस्लिमों का फायदा उठाने का आरोप लगाते हुए मुहिम चालू की थी। महज दो सालों में जिस तरह से पार्टी ने अपनी परफॉर्मेंस दिखाई है, यह कहना गलत नहीं होगा कि पार्टी लोकसभा चुनाव में फर्क डाल सकती है। खासकर साउथ बंगाल की बात की जाए तो आईएसएफ का शानदार प्रदर्शन टीएमसी की नींद उड़ाने वाला है, जहां एकतरफा मुस्लिम वोट पाती आई ममता की पार्टी को ISF ने पटखनी दे दी। यही वजह है कि पंचायत चुनाव का ऐलान होते ही टीएमसी और आईएसएफ कार्यकर्ताओं के बीच खासा तनाव देखने को मिला था।

विपक्ष वाला महागठबंधन भी बना नाराजगी की वजह
बंगाल में कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन एक साथ चुनाव लड़ते हैं। वहीं केंद्र में बीजेपी की सत्ता को हटाने के लिए सारे विपक्षी दल एक साथ आ गए हैं। महागठबंधन में ममता ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए एक सुर में बीजेपी की खिलाफत की है। राजनीतिकारों का मानना है कि लोकल लेवल पर कार्यकर्ताओं में इसको लेकर नाराजगी है कि राज्य में खिलाफत और केंद्र में एक साथ आना सही नहीं है। हो सकता है कि इसका भी असर मुस्लिम वोटों की टीएमसी से दूरी बनाने पर पड़ा हो।

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