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Tuesday, March 17, 2026
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एनडीए नाम का अमीबा, मोदी को 36 दलों की जरूरत क्यों? CBI से ED… उद्धव ने चलाए तीर

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मुंबई

उद्धव ठाकरे ने संजय राउत को दिए एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी और एनडीए पर जमकर निशाना साधा है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि कई वर्षों बाद यह पता चला है कि इस देश में ‘एनडीए’ नामक कोई अमीबा जीवित है। दूसरी तरफ हमारे जैसे देशभक्त राजनीतिज्ञ हैं जिन्होंने ‘इंडिया’ नामक एक गठबंधन बनाया है। उसी दिन हमारे माननीय प्रधानमंत्री ने 36 दलों को दावत दी। सच कहें तो उन्हें उन 36 दलों की कोई आवश्यकता ही नहीं है। कुछ पार्टियों के पास तो एक भी सांसद नहीं हैं। असली शिवसेना ‘एनडीए’ में नहीं है।’ सारे गद्दार वहां चले गए हैं। उनके ‘एनडीए’ में अब ईडी, इनकम टैक्स और सीबीआई ये तीन दल ही मजबूत हैं।’ ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स भी अब एनडीए में शामिल हो गए हैं और यही उनकी शक्ति है!’ उद्धव ठाकरे ने कहा, साल वर्ष 2024 हमारे देश के जीवन को नया मोड़ देगा। ब्रिटिश साम्राज्य का सूर्य भी अंतत: अस्त हुआ ही था। हर किसी का अंत होता ही है। यह प्रकृति का नियम है।’

फिर मिलेगा शिवसेना नाम!
पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर भी उद्धव ठाकरे अपना पक्ष रखा। उद्धव ने कहा कि शिवसेना का चुनाव चिन्ह धनुष-बाण और मशाल यह मेरे लिए बाद में आई हुई चीजें हैं। सबसे पहले शिवसेना आई। यह नाम बहुत महत्वपूर्ण है। हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख ने भी ये कहा है कि शिवसेना नाम प्रबोधनकार, मतलब मेरे दादा जी का दिया हुआ है। मैं बार-बार यह कहता आया हूं कि चुनाव आयोग का काम चुनाव चिह्न देना है। पार्टी का नाम देना या पार्टी का नाम बदलना नहीं। इसलिए अब हम चुनाव आयोग द्वारा दिए गए अजीब फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गए हैं और मुझे यकीन है कि हमने सुप्रीम कोर्ट में अपना मामला पेश करते समय सभी अहम बातें रखी हैं। मुझे यकीन है कि ‘शिवसेना’ नाम हमें फिर से मिल जाएगा।

नए महाराष्ट्र का निर्माण हो रहा
उद्धव ठाकरे ने कहा कि नए महाराष्ट्र का निर्माण हो रहा है और यही प्रकृति का नियम है। जब इन घटनाओं की शुरुआत हुई, उसी समय मैंने कहा था कि सड़े हुए पत्ते गिरने ही चाहिए। उन पत्तियों के गिरने के बाद नए अंकुर निकलते हैं। कोंपल फूटती हैं और पेड़ों पर ताजा, कोमल पत्तियों और फूलों के साथ फिर से बहार आती है। आज यही स्थिति शिवसेना की है। सड़े-गले पत्ते अब झड़ चुके हैं। नए अंकुर फूटे हैं। जब उद्धव से यह सवाल हुआ कि इन सड़े हुए पत्तों को कल तक आपने ही अंकुरित किया था।

तब उन्होंने कहा कि हां, आप जो कह रहे हैं, वह सत्य है। कई बार हमारे साथ धोखा हो जाता है। जिन्हें हम अपना समझते हैं, वे परजीवी निकलते हैं। फिर भी वे हमारे साथ हैं, ऐसा हमें लगता रहता है लेकिन असल में वे उसकी शाखाओं के जरिए मूल वृक्ष का रस सोखते रहते हैं। जबकि पेड़ को लगता है कि वे हमारे साथ हैं।

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