हिसार
21वीं सदी में जहां समाज आगे बढ़ता दिख रहा है तो वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनका अंधविश्वास से पर्दा नहीं उठ पाया है। कुछ ऐसी ही तस्वीर हिसार जिले के हांसी से भी सामने आई है, जहां 5 साल के बच्चे को उसके मां-बाप ने डेरे में साधुत्व के लिए दान कर दिया। मामला हांसी के सिसाए गांव का है, जहां साधुओं के डेरे में एक 6 साल के मासूम को छोड़ दिया गया। इसकी जानकारी लगते ही पुलिस सिसाए डेरे में पहुंची। अधिकारियों ने बच्चे से सवाल किए, जिसके बाद बच्चे का मेडिकल कराने के बाद उसे सीडब्ल्यूसी को सौंपा दिया गया। इस तरह से मंदिर या व्यक्ति को बच्चा दान देने का देश के किसी कानून में कोई प्रावधान नहीं है। ऐसा करना बाल संरक्षण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के तहत भी जुर्म है।
साढ़े 5 साल की उम्र में छोड़ गए थे पिता
सिसाए गांव में बाबा चांदपुरी श्री श्री 1008 महाराज के डेरे में 6 वर्षीय साधु सुबह उठकर गांव में भिक्षा मांगते हुए नजर आता था। यह छोटा साधु सोमवार गिरी महाराज के साथ रह रहा था। सोमवार गिरी महाराज का कहना है कि साधुओं ने बच्चे का नामकरण भी किया है। अब बच्चे को शंकर गिरी का नाम दिया गया है। उसके पहले का नाम अमीर था। सोमवार गिरी का कहना है कि जब बच्चा साढ़े 5 साल का था, तब उसके पिता ने उसे कनोह गांव में स्थित ढेरे में दान किया था, जिसके बाद से ये बच्चा उनके साथ ही रह रहा था। सोमवार गिरी महाराज जिस भी डेरे में जाते थे, मासूम बच्चा उनके साथ रहता था।
क्या कहता है नियम?
जुवेनाइल एक्ट के अनुसार अगर किसी माता-पिता को अपना बच्चा छोड़ना है तो उन्हें चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी या जिला बाल संरक्षण यूनिट के समक्ष जाना होगा, जहां बच्चे के माता-पिता की काउंसलिंग और पूरी प्रक्रियाओं के बाद बच्चा बाल संरक्षण अधिकारी के संज्ञान में रहेगा। दो महीने का परिवार को समय दिया जाता है। इस अवधि में अगर मां-बाप का मन बदल जाता है तो वह बच्चा वापस ले सकते हैं। गोद लेने के लिए भी भारत सरकार ने सीएआरए अथॉरिटी का गठन कर रखा है।
पहले भी हांसी से सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं
मंदिरों में मन्नत मांगने वाले कुछ अंधविश्वासी लोग बच्चा होने पर मंदिरों में दान करने का ऐलान कर देते हैं। हांसी के समाधा मंदिर में भी कई साल पूर्व मंदिर के वर्तमान गद्दी सीन पाचमपूरी को भी पंजाब के एक परिवार ने मंदिर में दान दिया था। 7 सात पहले हांसी के एक परिवार ने अपनी इच्छा से तीन माह के बच्चे को मंदिर में दान कर दिया था। करीब 3 तीन साल पहले हांसी के समाधा मंदिर में एक महीने के बच्चे को मंदिर में दान दे दिया था, जिसके बाद मामला सुर्खियों में आने के बाद पूर्व राज्य बाल संरक्षण चेयरपर्सन ज्योति बैंदा ने संज्ञान लिया और खुद हांसी के समाधा मंदिर पहुंची थी, जहां से बच्चे को रेस्क्यू करवाने के बाद परिजनों को सशर्त सौंप दिया गया था।
