मध्य प्रदेश में 28 नए मंत्रियों की शपथ ग्रहण के चार दिन बाद भी विभागों की घोषणा नहीं हो पाई है क्या यह बताता है की मुख़्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव किसी दबाव में है या फिर केंद्र से किसी बात पर सहमति नहीं बन पाई है। आइये देखते है डॉक्टर मोहन यादव की चंद्र कुंडली और उनकी शपथ ग्रहण की कुंडली क्या संकेत दे रही है. 25 मार्च 1965 में उज्जैन में जन्मे श्री यादव की धनु राशि है और केंद्र में बुध आदित्य योग और शुक्र द्वारा मालव्य योग से कुंडली को बहुत बल मिल रहा है। पर अष्टमी तिथि और चंद्र केमद्रुम योग से प्रभावित हे इसलिए उग्र हिन्दू धर्म के समर्थक मोहन यादव को अपनी तेज तर्रार छवि के चलते अपनी ही पार्टी के बड़े नेताओं से कुछ संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है पूर्व मुख़्यमंत्री शिवराज की राशि मकर से इनकी राशि धनु दो बारह का सम्बन्ध बना रही है जो दोनों के मधुर सम्बन्ध के लिए कतई शुभ नहीं है.
मोहन यादव का शपथ ग्रहण 13 दिसंबर को मूल नक्षत्र, शूला योग और शुक्ल प्रतिपदा के मुहूत्र में हुआ। मूल नक्षत्र क्रूर नक्षत्र में और यह शपथ ग्रहण के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है और फिर कुम्भ लग्न की कुंडली में लग्नेश और गुरु मरण कारक स्थान में है औऱ कुंडली के अष्टम भाव में केतु इनको मेहनती परंतु संघर्ष के लिए बाध्य करेगा. सूर्य का अभिजीत भाव में मंगल की युति में होना प्रदेश में कानून व्यवस्था तथा पुलिस प्रशासन मे कड़ाई से लागू करना औऱ नई उद्योग नीतियों को लागू करने में मदद करेंगे .
गुरु का तृतीय भाव में मेष राशि में तथा इसका भावपति केतू के अष्टम में चलते यह प्रदेश के पुराने दिग्गज नेताओ के प्रतिशोध और षड़यंत्र से परेशान हो सकते हैं पर इनकी एक सख्त और कुशल प्रशासक की छवि हमेशा बनी रहेगी. मध्य प्रदेश के चुनाव में भाजपा को भारी बहुमत से विजय के बाद जनता को सरकार से बहुत उम्मीद है कि प्रदेश विकास में और अधिक तरक्की कर पाए इसलिये डॉक्टर मोहन यादव को जल्द ही सारी उलझनों से निकल कर एक्शन में आना पड़ेगा.
सुभाष सक्सेना
ज्योतिष आचार्य
