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Tuesday, April 28, 2026
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मामा का घर, राजतिलक से पहले वनवास… बयानों से किसे और क्या संदेश दे रहे हैं शिवराज

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भोपाल

मध्य प्रदेश में ‘मोहन राज’ के आगाज को अब 20 दिन से अधिक हो गए हैं लेकिन पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं. सूबे में सरकार की कमान मोहन यादव को सौंपे जाने के बाद शिवराज कभी खेत में ट्रैक्टर चलाते नजर आते हैं तो कभी लाडली बहनों के बीच. अब वो अपने बयान और नए सरकारी आवास को लेकर चर्चा में हैं. शिवराज ने अपने निर्वाचन क्षेत्र बुधनी में मुख्यमंत्री नहीं बन पाने को लेकर बयान दिया है.

उन्होंने कहा कि कई बार राजतिलक होते-होते वनवास भी हो जाता है. ऐसा किसी ना किसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए ही होता है. कोई बड़ा उद्देश्य होगा. शिवराज ने ये भी जोड़ा कि मेरी जिंदगी बहन-बेटियों और जनता-जनार्दन के लिए है. आंखों में आंसू नहीं रहने दूंगा, दिन-रात काम करूंगा. उन्होंने सीएम हाउस छोड़ने के बाद अपने आवास का पता भी बताया और ये भी कहा कि उसका नाम रख दिया है ‘मामा का घर’.

शिवराज के इस सामान्य से दिखने वाले बयान के अपने निहितार्थ हैं. इसमें कसक है तो भविष्य की उम्मीद भी, जनसेवा का संकल्प है तो मामा वाली इमेज को सहेजने का रोडमैप भी. शिवराज कभी मध्य प्रदेश छोड़कर कहीं नहीं जाने की बात करते हैं तो अब राजतिलक से पहले वनवास, बड़ा उद्देश्य की बात कर रहे हैं. सवाल उठ रहे हैं कि शिवराज के मन में क्या है? उनके बयान और आवास का नाम किस बात का संकेत है?

किस बड़े उद्देश्य की बात कर रहे हैं शिवराज
दरअसल, राजतिलक से पहले वनवास का प्रसंग भगवान राम से ही जुड़ा है. अयोध्या में भव्य मंदिर तैयार हो रहा है और 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है. वनवास के बाद राम लौटे और उनका राजतिलक भी हुआ. राम ने अश्वमेध यज्ञ भी किया और बड़े-छोटे राजाओं ने उनकी प्रभुसत्ता स्वीकार भी की.

शिवराज वनवास के पीछे बड़ा उद्देश्य देख रहे हैं तो उनकी नजर मध्य प्रदेश की सत्ता पर है या अश्वमेध यज्ञ के स्वरूप में देश की सत्ता पर? राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी ने कहा कि शिवराज ऐसे नेता नहीं हैं जिसे आसानी से निपटा दिया जाए, वह हालात देखकर रणनीति बदल लेते हैं. उम्र का फैक्टर शिवराज के साथ है और निश्चित रूप से उनकी नजर अब पीएम मोदी के बाद के दौर की केंद्रीय राजनीति पर होगी. शिवराज संकेतों की सियासत से बीजेपी नेतृत्व, संघ और अपने कोर वोटर महिलाओं और युवाओं को लगातार संदेश दे रहे हैं.

किसे और क्या संदेश दे रहे शिवराज
शिवराज सिंह चौहान के बयान हों या अपने नए ठिकाने का नाम, महिला और युवा वोटर्स के लिए संदेश है. वह चुनाव नतीजों के बाद से ही बार-बार यह दोहराते रहे हैं कि मामा और भैया का नाता किसी भी पद से बड़ा है. यह वोटर्स के लिए यह संदेश है कि वह उनसे अपना कनेक्ट नहीं छोड़ने वाले. बड़े उद्देश्य की बात करने को समर्थकों और पार्टी नेतृत्व के लिए इस संदेश की तरह देखा जा रहा है कि वह सियासत से दूर नहीं होने जा रहे. इसी तरह जब वह अपनी जगह किसी दूसरे को सीएम बनाए जाने का विरोध नहीं करते और यह कहते हैं कि पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी उसे निभाएंगे तो यह पार्टी के साथ ही आरएसएस के लिए भी संदेश बताया जा रहा है.

अब सवाल यह भी है कि शिवराज के इस बयान में संघ और बीजेपी के लिए क्या संदेश हो सकता है? अमिताभ तिवारी कहते हैं कि नरेंद्र मोदी के बाद प्रधानमंत्री पद के दावेदारों की बात होती है तो अमित शाह से लेकर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के नाम गिनाए जाते हैं. मध्य प्रदेश में लंबे समय तक सरकार चलाने का अनुभव और ओबीसी चेहरे के साथ ही महिला और युवा वोट बैंक में मजबूत पैठ शिवराज को भी मजबूत दावेदार बनाते हैं. अब शिवराज नहीं चाहेंगे कि अगर प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने की संभावना कभी बने तो उनका अनुशासनहीन बयान या ऐसे बयान या कार्य को लेकर संघ की नाराजगी उन्हें भारी पड़े. यही वजह है कि वह सीएम की कुर्सी गंवाने के बावजूद अनुशासित सिपाही की इमेज को और मजबूत करने की कोशिश में लगे हैं

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