मुजफ्फरपुर
देखिए जब से केके पाठक आए हैं। ये तानाशाही जारी है। हम शिक्षक हैं। हम बुद्धिजीवी वर्ग से आते हैं। हमें आंदोलन नहीं करना है। सवाल उठता है कि किसी के धार्मिक पर्व में उसे आप डिस्टर्ब नहीं कर सकते हैं। आप उन्हें तंग नहीं कर सकते हैं। ईद के दिन शिक्षकों की ट्रेनिंग रखने का क्या मतलब है। ईद साल भर में एक बार आने वाला पर्व है। उस दिन माइनॉरिटी के पांच हजार के लगभग शिक्षक इस ट्रेनिंग में जाएंगे। ये अच्छी बात नहीं है। हम शिक्षा विभाग को चेतावनी देते हैं कि वो अपने आदेश पर दोबारा विचार करे। वरना शिक्षकों का गुस्सा बारूद की तरह फट सकता है। इससे शिक्षा विभाग को काफी परेशानी होगी। ये कहना है कि परिवर्तनकारी शिक्षक संघ के सदस्यों का। उन्होंने मुजफ्फरपुर में एनबीटी ऑनलाइन से बातचीत में सीधे-सीधे शिक्षा विभाग और केके पाठक को चेतावनी दे डाली।
ईद पर ड्यूटी नहीं करेंगे
परिवर्तनकारी शिक्षक संघ के सदस्यों ने कहा कि जब से केके पाठक आए हैं। उन्हें जानवरों की तरह ट्रीट किया जा रहा है। शिक्षक जानवर नहीं हैं। उन्हें पशुओं की तरह डंडे से हांक रहे हैं। ऐसा करना बिल्कुल भी ठीक नहीं है। हम डंडे से हांके जाने वाले लोग नहीं हैं। ईद की छुट्टी के दिन ट्रेनिंग रखना और स्कूल खोलना कहीं से भी जायज नहीं हैं। शिक्षकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि आप पता लगा लीजिए जिस दिन से केके पाठक आए हैं उसके बाद से महिला शिक्षक बीमार रहने लगी हैं। कितने शिक्षकों को बीपी वाली बीमारी हो गई है। कोई भी शिक्षक चैन से स्कूल में जाकर पढ़ा नहीं रहा है। हम लोगों ने 23 सालों से मेहनत करके शिक्षा और स्कूलों को सुधारा है। उसमें लगातार सेवा देते आए हैं। अब केके पाठक के आने के बाद होली, दिवाली, दशहरा और रक्षाबंधन मनाना मना हो गया है। सभी लोग तनाव में जी रहे हैं। ऐसा नहीं चलेगा। यदि विभाग आदेश वापस नहीं लेता है, तो हम लोग आंदोलन करेंगे।
तानाशाही नहीं चलेगी-शिक्षक
शिक्षकों ने एनबीटी ऑनलाइन को बताया कि ईद के दिन वो किसी भी ट्रेनिंग में नहीं जाएंगे। स्कूल भी नहीं जाएंगे। देखते हैं कौन क्या कर लेता है। एक शिक्षक ने कहा कि सम्राट चौधरी का अब मुंह नहीं खुल रहा है। उन्हें अब धर्म नहीं दिख रहा है। मुख्यमंत्री के आदेश को केके पाठक नहीं मानते हैं। आज भी 10 बजे से पहले स्कूल को खोला जाता है। नियमानुसार स्कूल को खोलना और बंद होने नहीं दिया जा रहा है। अधिकारी निरीक्षण के लिए साढ़े आठ बजे स्कूल पहुंच जाते हैं। कोई अधिकारी नौ बजे पहुंच जाता है। नीतीश कुमार ने कहा था कि दस बजे ही स्कूल खुलेगा और चार बजे तक चलेगा, लेकिन तानाशाही अभी भी जारी है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को केके पाठक ने निर्देश दे रखा है कि शिक्षकों को तंग किया जाए। ऐसा नहीं चलेगा। हम लोगों को मजबूर किया जा रहा है कि हम लोग आंदोलन करें। शिक्षकों ने यहां तक कहा कि आने वाले दिनों में बारूद बनकर शिक्षकों का गुस्सा फट सकता है। उसके बाद संभालने की जिम्मेदारी सरकार की होगी।
केके पाठक के खिलाफ मोर्चा
ध्यान रहे कि शिक्षा विभाग इन दिनों लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के नये-नये आदेशों को लेकर अक्सर हलचल रहती है। अब एक बार फिर नये फरमान से शिक्षकों में फिर आक्रोश बढ़ गया है। नये आदेश के तहत ईद के दिन भी शिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम रख दिया गया है। शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार, बिहार के 19 हजार 200 शिक्षकों ट्रेनिंग लेनी हैं जिसको लेकर केके पाठक के निर्देश पर शेड्यूल जारी किया गया है। मुसलमानों के पर्व ईद के दिन सरकारी शिक्षकों को ट्रेनिंग लेना है। बिहार सरकार के इस आदेश को लेकर बिहार के सरकारी शिक्षकों में काफी रोष है। मुजफ्फरपुर परिवर्तनकारी शिक्षक संघ के सदस्यों का कहना है कि सरकार का यह निर्णय सही नहीं है। सरकार को इस आदेश पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। आदेश के अनुसार शिक्षकों को लगातार प्रशिक्षण लेना है। इसके लिए बिहार के 78 ट्रेनिंग संस्थानों निर्धारित किया है। जिनमें प्रशिक्षण लिया जाना है। अब इस मामले को लेकर परिवर्तनकारी शिक्षक संघ ने केके पाठक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
