लखनऊ:
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने अति पिछड़ा वर्ग आरक्षण की समीक्षा कराने पर विचार शुरू कर दिया है। ओबीसी आरक्षण के तहत मुसलमानों को दिए जाने वाले आरक्षण के आधार की जांच कराई जाएगी। उत्तर प्रदेश में 24 से ज्यादा मुस्लिम जातियों को आरक्षण का लाभ मिलता है। ओबीसी वर्ग में मुसलमान के आरक्षण के मामले पर सरकार ने जांच करने की तैयारी शुरू कर दी है। मीडिया रिपोर्ट आने के बाद ओबीसी आरक्षण पर चर्चा का बाजार गरमा गया है। लोकसभा चुनाव के छठे चरण की वोटिंग से पहले मुस्लिम आरक्षण पर यह बड़ा मामला सामने आ गया है। मुस्लिमों को आरक्षण के आधार पर जांच कराए जाने की तैयारी है। मुसलमानों को सामाजिक और शैक्षिक स्थिति के आधार पर आरक्षण दिए जाने का मामला सामने आया है।
धर्म के आधार पर आरक्षण की चर्चा
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने धर्म के आधार पर आरक्षण के मसले पर पिछले दिनों लगातार कई बयान दिए हैं। वहीं, लोकसभा चुनाव के मैदान में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ तक धर्म के आधार पर आरक्षण के मसले पर कांग्रेस को घेरते रहे हैं। ऐसे में यूपी में योगी सरकार ने धार्मिक आधार पर आरक्षण दिए जाने को लेकर अब जांच कराने की तैयारी कर ली है। उत्तर प्रदेश में मुसलमानों जातियों को ओबीसी आरक्षण का लाभ मिलता है।
सरकार यह जांच कराएगी कि आखिर मुसलमानों को किस आधार पर आरक्षण दिया जा रहा है? दरअसल, मुसलमान में जातियों का कॉन्सेप्ट नहीं होने का दावा किया जाता है। संविधान में धार्मिक आधार पर आरक्षण न दिए जाने की बात कही गई है। ऐसे में अगर आर्थिक आधार पर मुसलमान को आरक्षण दिया जा रहा है तो वह हिंदू समाज के सामान्य वर्ग के गरीब तबके को मिलने वाले आरक्षण के आधार पर होना चाहिए। ओबीसी आरक्षण के दायरे में नहीं रखे जाने की बात कही जा रही है।
यूपी में आया है मामला
संविधान के आरक्षण के आधार पर ओबीसी कोटे को यूपी में 27 फीसदी आरक्षण दिया जाता है। इस आरक्षण का लाभ मुसलमानों की करीब दो दर्जन जातियों को मिल रहा है। सरकार यह जांच कर रही है कि मुसलमानों को मिलने वाले आरक्षण का लाभ किस आधार पर दिया जा रहा है। सरकार के स्तर पर प्रारंभिक जांच के दौरान अधिकारियों के समक्ष अलग मामले सामने आए।
जांच में पता चला है कि समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान मुसलमानों की 24 से अधिक जातियों को ओबीसी आरक्षण के दायरे में लाया गया। हालांकि, उन्हें किस आधार पर आरक्षण दिया गया, इसका जिक्र नहीं किया गया है। भाजपा का दावा है कि यह नियम के खिलाफ कार्रवाई है।
सरकार के स्तर पर होगा फैसला
सरकार के स्तर पर इस मामले की जांच कराई जाएगी कि आखिर कैसे मुसलमानों को आरक्षण का लाभ दिया गया? सरकार के स्तर पर जांच के बाद इस पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। सूत्रों का दावा है कि यूपी ओबीसी आयोग इस मामले में आवश्यक जानकारियां जुटा रहा है। अधिकारियों की ओर से निर्देश दिया गया है कि इस रिजर्वेशन की तमाम बारीकियों पर गौर किया जाए। आरक्षण दिए जाने के आदेश से लेकर अब तक लाभ पाने वालों तक के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी।
विभागीय स्तर पर जुटाया गया पूरा ब्योरा सीएम योगी आदित्यनाथ के समक्ष पेश किया जाएगा। इसके बाद बैठकों का दौर शुरू होगा। इसमें मुसलमानों को ओबीसी आरक्षण के तहत दिए जाने वाले और दिए गए लाभ पर अहम फैसला हो सकता है।
