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Tuesday, April 21, 2026
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अमेरिका के बाद अब चीन ने बढ़ाई कनाडा की मुश्किलें, जानें कैसे बुरे फंसे भारत विरोधी जस्टिन ट्रूडो

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बीजिंग

अमेरिका के राष्ट्रपति निर्वाचित डोनाल्ड ट्रंप के टैक्स बम के बाद अब चीन ने कनाडा की मुश्किलें बढ़ाने की तैयारी कर ली है। चीन ने रविवार को कहा है कि वह उइगरों और तिब्बत से संबंधित मानवाधिकार के मुद्दों में शामिल दो कनाडाई संस्थानों सहित 20 लोगों के खिलाफ प्रतिबंध की कार्रवाई करने जा रहा है। ट्रंप ने पहले ही कहा है कि वह 20 जनवरी को पद संभालते ही कनाडा के खिलाफ 25 प्रतिशत टैक्स बढ़ोत्तरी वाले कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे। इससे पहले से ही संकट में घिरे कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।

चीन ने क्या ऐलान किया
चीन के विदेश मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर घोषणा की कि शनिवार को प्रभावी हुए इन उपायों में संपत्ति जब्त करना और प्रवेश पर प्रतिबंध लगाना शामिल है और इनके निशाने पर कनाडा का उइगर अधिकार वकालत परियोजना और कनाडा-तिब्बत समिति शामिल है। चीन ने कहा कि वह इन दोनों संस्थानों की चल संपत्ति, अचल संपत्ति और चीन के क्षेत्र में अन्य प्रकार की संपत्ति को फ्रीज कर रहा है।

15 कनाडाई लोगों की संपत्तियों को करेगा फ्रीज
यह उइगर संस्थान के 15 लोगों और तिब्बत समिति के पांच लोगों की चीन में संपत्ति को फ्रीज कर रहा है, और उन्हें हांगकांग और मकाऊ सहित चीन में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगा रहा है। बीजिंग में कनाडाई दूतावास को किए गए कॉल का कोई जवाब नहीं मिला। इस प्रतिबंध पर कनाडा के इन मानवाधिकार समूहों या ग्लोबल अफेयर्स कनाडा से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

चीन पर क्या आरोप लगा रहे मानवाधिकार समूह
अधिकार समूहों ने चीन पर उइगरों के व्यापक शोषण का आरोप लगाया है, जो मुख्य रूप से मुस्लिम जातीय अल्पसंख्यक हैं। चीन ने लगभग एक करोड़ उइगर मुसलमानों को शिनजियांग के पश्चिमी क्षेत्र में नजरबंदी शिविरों में कैद करके रखा है। यहां पर इन लोगों को जबरन श्रम करवाया जाता है। हालांकि, चीन ने किसी भी तरह के शोषण से इनकार किया है। चीन ने 1950 में तिब्बत पर नियंत्रण कर लिया था, जिसे वह सामंतवादी दासता से “शांतिपूर्ण मुक्ति” के रूप में वर्णित करता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों और निर्वासितों ने तिब्बती क्षेत्रों में चीन के दमनकारी शासन की नियमित रूप से निंदा की है।

जस्टिन ट्रूडो की बढ़ेगी मुश्किलें
जस्टिन ट्रूडो इन दिनों न सिर्फ बाहरी, बल्कि आंतरिक संकट का भी सामना कर रहे हैं। इस कारण उनकी प्रधानमंत्री की कुर्सी भी खतरे में हैं। ट्रूडो के कार्यकाल में कनाडा के अमेरिका, भारत और चीन के साथ रिश्ते बहुत खराब हुए हैं। ये तीनों देश ऐसे हैं, जिनके साथ वर्तमान में दुनिया का कोई भी मुल्क संबंधों को खराब करना नहीं चाहेगा। वहीं, कनाडा में जस्टिन ट्रूडो की लोकप्रियता तेजी से गिर रही है। उनके पूर्व सहयोगी जगमीत सिंह ने अविश्वास प्रस्ताव लाने का ऐलान किया है।

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