भोपाल ।
राजधानी में भू—माफियों के हौंसले इतने बुलंद है कि वह आम आदमी को सरकारी जमीन बेंचने से भी नहीं कतरा रहे हैं । हालात यह हो गये है कि इनकी माफिया गिरी के चलते आम आदमी लुट रहा है । माफिया और कुछ राजस्व अधिकारियों के मिली भगत से इस काम को अंजाम दिया जा रहा है । यदि सरकार ने ऐसे कामों पर जल्द ही लगाम नहीं लगाई तो लोगों के पास लुटने के अलावा कोई चारा नहीं । हाल ही में एक ऐसा ही मामला सामने आया है कि जिसमें भोपाल कलेक्टर ने सख्त कार्यवाही करते हुये दोषियों पर शासकीय भूमि को क्षति पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के निर्देश उन्होंने अपने आदेश मे साफ कहा है कि ऐसे लोगों के नामांतरण करने किस—किस अधिकारी की क्या भूमिका रही है तथा कौन—कौन किस स्तर तक दोषी है इसका परीक्षण किया जाये ।
जानकारी के मुताबिक यहां कि भूमि खसरा क्रमांक 75/1/1/1 रकबा 12 डी. विक्रय की गई सरकारी जमीन जो आधिपथ्य अन्य किसी खसरे की भूमि अंकित कर सौंप दिया गया था । उसे सरकार ने कलेक्टर के आदेश के बाद न केवल सरकारी घाषित की बल्कि उसका कब्जा जस संसाधन विभाग को जल्द ही सौंप दिया जायेगा । बड़ी बात यह है कि जिन लोगों को यह भू—खंड बेचे गये थे उनमें संतोष साहू,भारत सिंह,अरूण कुमार लोधी,सोनम साहू,गौतम कीर,दुर्गेश कीर,अभिषेक लोधी,ईश्वर बाई एवं राजेन्द्र गर्ग का सरकारी अभिलेखों में नामांतरण निरस्त करते हुये इसे सरकारी घोषित कर दिया गया ।
सबसे अलग बात यह है कि इस नामांतरण के निरस्त होने के बाद माफिया ने तो ग्राहकों से तो लाखों कबाड़ लिये लेकिन अब वह दर—दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं । उन्हें विक्रय किये गये भू—खंड की राशि मिलेगी या नहीं इसको लेकर सभी परेशान है । बता दें कि माफिया द्वारा शासकीय भूमि का मामला भी अजीबों—गरीब है यह जमीन नहर के लिये 1961 में अंकित की गई थी । अभी भी खसरा नंबर 62/1,65/2,66/2/2 रकबा करीब 2 एकड़ जमीन पर बाउंड्रीवाल बनाने की तैयारी जारी है ।
राजधानी में भू—माफियाओं की चलने के कारण आम उपभोक्ता अपनी खून—पसीने की कमाई गवां रहा है । राजस्व अमले की मिली भगत एक नहीं कई जगह पर सुनने को मिल रही है यदि जिला प्रशासन ने ऐसे मामलों में जल्द ध्यान नहीं तो और भी सरकारी जमीन बिकती रहेगी और उपभोक्ता परेशान होते रहेंगे ।
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