भोपाल
राज्य शिक्षा केंद्र, स्कूल शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश द्वारा भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के सहयोग से प्रदेश के स्कूलों में विद्यार्थियों की सुविधा के लिए ‘आधार अब स्कूल के द्वार’ अभियान का अगला चरण 1 अप्रैल से शुरू किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके विद्यालय परिसर में ही आधार से संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराना है, जिससे नामांकन और अपडेट के लिए अलग से कहीं जाने की आवश्यकता न पड़े।
यह अभियान 1 अप्रैल से 15 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को विद्यालय स्तर पर ही आधार से जुड़ी सेवाओं का लाभ मिलेगा। इससे पहले भी यह अभियान 15 अगस्त से 31 अक्टूबर के बीच दो चरणों में आयोजित किया जा चुका है, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को लाभ मिला था। स्कूल शिक्षा विभाग की यह पहल मुख्य रूप से बच्चों के अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) पर केंद्रित है। इसके अंतर्गत आधार में बच्चों के उंगलियों के निशान, आईरिस स्कैन और फोटो को अपडेट किया जाता है। पहला बायोमेट्रिक अपडेट बच्चे के 5 वर्ष की आयु होने पर और दूसरा अपडेट 15 वर्ष की आयु पर किया जाना आवश्यक होता है। 15 से 17 वर्ष की आयु के बीच यह अपडेट निशुल्क किया जाता है, जबकि इसके बाद शुल्क लागू होता है। अद्यतन बायोमेट्रिक वाला आधार कार्ड स्कूल प्रवेश, प्रवेश परीक्षाओं, छात्रवृत्ति और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) जैसी सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण है। इसी के साथ सरकार विद्यार्थियों की 100 प्रतिशत अपार आईडी (APAAR ID) बनाने का भी लक्ष्य लेकर चल रही है। अपार आईडी विद्यार्थियों के सभी शैक्षणिक क्रेडिट जैसे स्कोर कार्ड, मार्कशीट, ग्रेड शीट, डिग्री, डिप्लोमा, प्रमाणपत्र और सह-पाठ्यक्रम संबंधी उपलब्धियों को डिजिटल रूप में संग्रहित, प्रबंधित और एक्सेस करने में मदद करती है। यह आईडी शिक्षा जगत में छात्र की स्थायी डिजिटल पहचान के रूप में कार्य करती है।
अपार आईडी बनाने के लिए यह आवश्यक है कि स्कूलों द्वारा यूडाइस-प्लस पोर्टल में दर्ज छात्र का नाम आधार कार्ड में दर्ज नाम से मेल खाए। स्कूल प्रवेश, प्रवेश परीक्षाएं, स्कॉलरशिप और डीबीटी जैसी सेवाओं का लाभ लेने के लिए विद्यार्थियों के पास अद्यतन बायोमेट्रिक वाला आधार होना जरूरी है। साथ ही एनटीए, यूपीएससी, जेईई, एनईईटी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भरने और परीक्षा केंद्रों में प्रवेश के लिए भी आधार से जुड़ी जानकारी आवश्यक होती है। इसलिए अद्यतन आधार होने से विद्यार्थियों की अपार आईडी बनाना भी आसान हो जाता है।
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