भोपाल। राजधानी भोपाल स्थित भेल की को-ऑपरेटिव समिति में काम करने वाले कर्मचारियों का भविष्य पूरी तरह अधर में लटक गया है, जिसके चलते वर्तमान और सेवानिवृत्त कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। कर्मचारियों का गंभीर आरोप है कि उनके भविष्य निधि (पीएफ) का पैसा आज दिनांक तक जमा नहीं किया गया है। इसके चलते समिति से रिटायर हो चुके मजदूर गंभीर आर्थिक संकट और मानसिक तनाव के दौर से गुजरने को मजबूर हैं।
सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि भेल में खुद को मजदूरों का बड़ा मसीहा और नेता बताने वाले दो युवा चेहरे यहाँ डायरेक्टर पद पर आसीन हैं, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों के हक और उनकी गाढ़े पसीने की कमाई को लेकर अब तक प्रबंधन या बोर्ड द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। पीड़ित मजदूरों का कहना है कि जिन नेताओं पर उन्होंने आंख मूंदकर भरोसा किया था, वे आज इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह चुप्पी साधे बैठे हैं।
समिति के कई कर्मचारी अपनी पूरी सेवा अवधि समाप्त कर रिटायर हो चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक नियमानुसार मिलने वाली ग्रेच्युटी की राशि तक नहीं मिल पाई है। जिंदगीभर भेल को अपनी सेवाएं देने वाले ये कर्मचारी अब बुढ़ापे में अपने ही पैसों के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को विवश हैं। मजदूरों में इस बात को लेकर गहरा गुस्सा है कि को-ऑपरेटिव सोसाइटी प्रबंधन और कथित मजदूर नेता दोनों ही अपनी जिम्मेदारी से लगातार पल्ला झाड़ रहे हैं।
कर्मचारियों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि जो लोग खुद को मजदूरों का सच्चा हितैषी बताते थकते नहीं थे, वही आज उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि पीएफ और ग्रेच्युटी जैसे बुनियादी कानूनी अधिकारों के लिए भी उन्हें दर-दर भटकना पड़ेगा, तो फिर मजदूरों की आवाज कौन उठाएगा? को-ऑपरेटिव सोसाइटी की इस रहस्यमयी चुप्पी ने अब कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मजदूरों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि उनकी इन ज्वलंत समस्याओं का जल्द न्यायसंगत समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में एक बड़ा और उग्र आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
