भोपाल। सर्वोच्च न्यायालय ने श्वान प्रेमियों (डॉग लवर्स) को बड़ा झटका देते हुए उनकी सभी याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने नवंबर 2025 के उस आदेश में किसी भी प्रकार का बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया है, जिसमें स्कूलों, अस्पतालों, कॉलेजों, बस स्टैंडों और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने के सख्त निर्देश जारी किए गए थे. कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि कड़वी सच्चाइयों के सामने आंखें नहीं मूंदी जा सकतीं।
आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों की घटनाएं सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं, जिससे न केवल छोटे बच्चे और बुजुर्ग प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि विदेशी पर्यटक भी भयभीत हैं. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि अत्यंत खतरनाक और लाइलाज रूप से बीमार कुत्तों को इंजेक्शन लगाकर मारा जा सकता है, क्योंकि लोगों की जान की सुरक्षा सबसे बेहद जरूरी है। जो भी अधिकारी इन निर्देशों का पालन नहीं करेंगे, उन पर अदालत की अवमानना का केस चलाया जाएगा।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की. अदालत ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अकेले राजस्थान के श्रीगंगानगर शहर में ही एक महीने के भीतर कुत्तों के काटने की 1084 घटनाएं सामने आईं, जिनमें छोटे बच्चों के चेहरों पर गहरे घाव हो गए. वहीं, तमिलनाडु में साल के पहले चार महीनों में ही श्वानों के हमले की लगभग 2 लाख घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 28 जुलाई को आवारा कुत्तों से जुड़े मामले पर स्वतः संज्ञान लिया था, जिसके बाद सूरत में एक जर्मन यात्री को कुत्ता काटने की घटना के बाद अदालत ने इस पर विस्तृत सुनवाई की. मामले में राज्यों, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया की दलीलें सुनने के बाद 29 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था. डोग लवर्स और कई एनजीओ (NGO) शीर्ष अदालत को अपनी दलीलों से संतुष्ट करने में पूरी तरह नाकाम रहे।
