भोपाल। अपनी धीमी रफ्तार और सीमित फेरों को लेकर चर्चा में आई भोपाल मेट्रो जल्द ही नए कलेवर में नजर आने वाली है। सुभाष नगर से एम्स के बीच करीब 7 किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर ट्रैक पर आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो चुका है। जुलाई में इस सिस्टम के चालू होते ही मेट्रो की स्पीड बढ़ जाएगी और यात्रियों को ट्रेनों के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इस नए सिस्टम की अंतिम जांच और ‘ओके’ रिपोर्ट के लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम को आमंत्रित किया गया है, जो अगले सप्ताह निरीक्षण के लिए भोपाल आ सकती है।
इससे पहले असिस्टेंट कमिश्नर की टीम प्रारंभिक जांच पूरी कर चुकी है। करीब 30 किलोमीटर लंबे रूट के लिए स्वीकृत 800 करोड़ रुपए के टेंडर का यह पहला चरण है, जिसके पूरा होने से मेट्रो प्रबंधन को बड़ी राहत मिलेगी। खत्म होगा 75 मिनट का लंबा इंतजार: वर्तमान में सिग्नलिंग सिस्टम न होने के कारण मेट्रो प्रबंधन को केवल एक ही ट्रैक (डाउन ट्रैक) पर दोनों दिशाओं में ट्रेनें चलानी पड़ रही हैं। इस वजह से ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी 75 मिनट रखनी पड़ रही है और यात्री कम होने के कारण मेट्रो का संचालन भी केवल दोपहर 12 से शाम 4 बजे के बीच ही किया जा रहा है।
जानकारों के मुताबिक, सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क की रीढ़ होता है, जो ट्रेनों की गति, सुरक्षित दूरी और ऑटोमेटेड ऑपरेशन को नियंत्रित करता है। भोपाल मेट्रो में अब दिल्ली मेट्रो जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे ट्रेनें दोनों ट्रैक (अप और डाउन) पर दौड़ सकेंगी। इस सिस्टम के लाइव होते ही ट्रेनों के बीच का अंतर (हेडवे) कम होगा, फेरे बढ़ेंगे और लोगों को सुबह-शाम ऑफिस टाइमिंग पर भी मेट्रो की सुविधा आसानी से मिल सकेगी।
