भोपाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, भोपाल (बेंच क्रमांक-1) ने स्पीड पोस्ट सेवा में देरी को गंभीर लापरवाही और सेवा में कमी मानते हुए डाक विभाग को फटकार लगाई है। आयोग के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ला और सदस्य डॉ. प्रतिभा पांडेय की पीठ ने विभाग को पीड़ित उपभोक्ता को ₹8,000 मुआवजा देने का आदेश सुनाया है। मामला भोपाल की ज्योति शर्मा से जुड़ा है, जिन्होंने 12 जनवरी 2026 को अरेरा हिल्स उप डाकघर से ₹1228 का प्रीमियम शुल्क चुकाकर एक पार्सल बुक किया था। इस पार्सल में श्रीमद्भगवद्गीता, शुद्ध घी की मिठाइयां और कपड़े थे। ज्योति ने उसी दिन एक अन्य पार्सल भी भेजा था जो महज 3 दिन में पहुंच गया, लेकिन घरेलू सामान और श्रद्धा से भरा यह मुख्य पार्सल स्थानीय पते पर होने के बावजूद पूरे 7 दिन की देरी से 19 जनवरी को डिलीवर हुआ। विभागीय सुस्ती के खिलाफ ज्योति शर्मा ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान डाक विभाग इस अत्यधिक देरी का कोई ठोस और तकनीकी कारण पेश नहीं कर सका। इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए आयोग ने कहा कि जब कोई उपभोक्ता अतिरिक्त शुल्क देकर स्पीड पोस्ट जैसी प्रीमियम सेवा का चयन करता है, तो समय पर डिलीवरी पाना उसका अधिकार है। केवल ‘सामान डिलीवर हो गया’ कहकर विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता। आयोग ने डाक विभाग को आदेश दिया है कि वह परिवादी को मानसिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति के रूप में ₹5,000 और वाद व्यय के ₹3,000 (कुल ₹8,000) का भुगतान दो महीने के भीतर करे। तय समय पर भुगतान न करने की स्थिति में विभाग को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
