– प्रशासन नहीं दे रहा है ध्यान
भोपाल
भेल प्रशासन की जितनी तारीफ की जाये कम है । उद्योग नगरी की सालाना लाखों की राजस्व वसूली का काम मामूली वेतन पर काम करने वाले ठेका मजदूरों को सौंप रखा है जबकि हर माह लाखों को वेतन प्राप्त करने वाले भेल के नियमित कर्मचारी आराम फरमा रहे हैं । लोगों ने इन नियमित कर्मचारियों को कभी उद्योग नगरी के बाजारों से पर्ची काटते या वसूली करते नहीं देखा है जबकि भेल प्रशासन ने वसूली का अधिकार इन्हें सौंप रखा है ।
मजेदार बात यह है कि यह नियमित कर्मचारी भेल के कुछ ट्रेड यूनियन नेताओं के इशारे पर भेल प्रशासन ने नगर प्रशासन विभाग भेजा है साफ जाहिर है कि जब इन्हें नेताओं के इशारे पर भेजा गया तो इनको काम करने की क्या जरूरत है । देखा जाये तो इन्हें उद्योग नगरी में अतिक्रमण हटाने में कोई दिलचस्पी दिखाई नहीं देती । यही नहीं अक्सर कुछ अतिक्रमण हटाने के दौरान भी ठेका मजदूरोंं को अपनी ताकत दिखाते हुये देखा गया है ।
जानकारी के मुताबिक भेल उद्योग नगरी गोंविदपुरा, पिपलानी, हबीबगंज, बरखेड़ा के अलावा अन्य छोटे बाजारों की तह वसूली का काम 7 ठेका मजदूरों को सौंपा गया है जबकि राजस्व वसूली वित्त से जुड़ा हुआ है । ऐसे में इसके पूरे अधिकार भेल के 8 नियमित कर्मचारियों के पास है। यूं तो यह बेदखली अमले का काम भी देख रहे हैं उस पर वसूली के अधिकार भी इन्हें सौंपे गये हैं । एक अनुमान के अनुसार उद्योग नगरी के बाजारों में 10,20,50,100 रूपये की पर्ची काट कर दुकानदारों से वसूले जाते हैं । सालाना लाखों की वसूली का काम ठेका मजदूरों को सौंप दिया है । नियमानुसार इन्हें वसूली के अधिकार ही नहीं है यह अधिकार सिर्फ भेल के नियमित कर्मचारियों को सौंपा गया है । इनमें एक सुपारवाइजर भी शामिल है ।
ऐसा कहा जाता है कि इन कर्मचारियों को हर माह एक लाख से ज्यादा वेतन मिलता है और सारे अधिकार भेल प्रशासन ने इन्हें ही सौंप रखे हैं फिर भी वसूली का यह काम ठेका मजदूरों के हवाले कर दिया गया है । ऐसे में यदि कोई वित्तीय गड़बड़ी हो तो उसका खामियाजा भी ठेका मजदूरों को ही भुगतना पड़ेगा न की नियमित कर्मचारियों को ।
बड़ी बात यह है कि कुछ नेताओं के ईशारे पर राजस्व वसूली और बेदखली अमले के काम के लिये भेजे गये यह नियमित कर्मचारी वास्तव में अपना काम ईमानदारी से कर रहे हैं या फिर नेतागिरी कर रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि इनमें से कुछ कर्मचारी तकनीकी की बेहतर जानकारी के बाद भी कारखाने के बजाय उद्योग नगरी के नगर प्रशासन विभाग में काफी खुश दिखाई दे रहे हैं क्योंकि यहां कोई रोकने-टोकने वाला नहीं है बल्कि चार पंच एक लंच के बाद या तो अपने आकाओं की सेवा या फिर घर में आराम ।
ऐसे एक नहीं उद्योग नगरी में कई विभाग जैसे सिविल पिपलानी, बरखेड़ा, गोविंदपुरा, हबीबगंज, सिविल गेस्ट हाउस, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट या फिर बिजली विभाग में देखा जा सकता है । लाखों का वेतन पाने वाले इन कर्मचारियों का उत्पादन से जुड़े विभागों में कहां उपयोग हो सकता है इसकी जरूरत मानव संसाधन विभाग ने समझी ही नहीं बल्कि नेताओं के दबाव में छोटे नेताओं को उद्योग नगरी में आराम फरमाने भेज दिया है । भेल प्रवक्ता का कहना है कि भेल प्रशासन समय-समय पर इन कर्मचारियों पर निगाह रखता है यदि ऐसा कोई मामला सामने आयेगा तो उस पर कार्यवाही की जायेगी ।
