भोपाल।
भेल (भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) में कार्यरत मजदूरों को पिछले 25 वर्षों से समान काम के बदले समान वेतन नहीं मिल पाया है। मजदूर संगठनों का आरोप है कि इतने लंबे समय में भेल के तथाकथित मजदूर नेता मजदूरों के हितों की रक्षा करने में पूरी तरह विफल रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर कई बार धरना-प्रदर्शन, हड़ताल और प्रबंधन के साथ बातचीत की गई, लेकिन आज तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। ठेका कर्मचारियों को आज भी बेहद कम वेतन में वही काम करना पड़ रहा है, जो नियमित कर्मचारी करते हैं। कर्मचारियों को फेल करने की साजिश का आरोप मजदूरों का आरोप है कि प्रबंधन और कुछ यूनियन नेताओं की मिलीभगत से कर्मचारियों के हितों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
कर्मचारियों को अलग-अलग ग्रेड और ठेकेदारों के नाम पर बांट दिया गया है, जिससे एकजुट संघर्ष कमजोर पड़ा है। प्रबंधन के साथ हुए समझौते का असर नहीं बताया गया कि पूर्व में प्रबंधन के साथ हुए कई समझौतों के बावजूद मजदूरों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। ठेका मजदूरों को आज भी न्यूनतम सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। औद्योगिक क्षेत्र की बदहाल स्थिति भेल सहित पूरे औद्योगिक क्षेत्र में ठेका मजदूरों की हालत दयनीय बनी हुई है।
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मजदूरों का कहना है कि जब तक समान काम-समान वेतन का कानून सख्ती से लागू नहीं होगा, तब तक शोषण जारी रहेगा। भेल सहित 6 इकाइयों में श्रमिक यूनियन सक्रिय खबर में उल्लेख है कि भेल की छह इकाइयों में श्रमिक यूनियन सक्रिय हैं, लेकिन मजदूरों के अनुसार इनका फायदा जमीनी स्तर पर कर्मचारियों को नहीं मिल पा रहा है।
