भोपाल
झीलों की नगरी भोपाल से सांप्रदायिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की एक अनोखी तस्वीर सामने आई है। यहाँ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग उठाई। इतवारा चौराहे पर आयोजित इस प्रदर्शन ने न केवल प्रशासन का ध्यान खींचा, बल्कि पूरे देश में हिंदू-मुस्लिम एकता का एक कड़ा संदेश भी भेजा।
इतवारा चौराहे पर गूंजे नारे
राजधानी के पुराने शहर स्थित व्यस्त इतवारा चौराहे पर मुस्लिम समाज के लोग एकत्रित हुए और ‘गौ माता का सम्मान’ करने के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। समाज के प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार से अपील की है कि गाय के महत्व और उसकी पौराणिक एवं आध्यात्मिक महत्ता को देखते हुए उसे अविलंब ‘राष्ट्रीय पशु’ का दर्जा दिया जाना चाहिए।
सौहार्द और सम्मान की आवाज
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भारत की संस्कृति मिल-जुलकर रहने की है। गाय के प्रति सम्मान व्यक्त करना किसी एक धर्म की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। मुस्लिम समुदाय द्वारा उठाए गए इस कदम की शहर भर में चर्चा हो रही है। लोगों का कहना है कि इस तरह के प्रयासों से समाज में आपसी विश्वास और भाईचारा और अधिक मजबूत होगा।
सरकार से की विशेष अपील
मुस्लिम समाज के प्रमुखों ने एक स्वर में सरकार से मांग की है कि गौ-संरक्षण के लिए कड़े कानून बनाए जाएं और गाय को राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक के रूप में स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि गौ माता के सम्मान में उठाया गया यह कदम देश में शांति और सद्भाव की नई मिसाल पेश करेगा।
