श्योपुर ,
नए साल पर कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन ने पर्यटकों को बड़ी खुशी खबरी दी है. करीब डेढ़ साल बाद कूनो नेशनल पार्क का मुख्य गेट टिकटोली भी आज से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है. प्रोजेक्ट चीता शुरू होने के बाद से ही ये गेट बंद था, क्योंकि चीतों का बाड़ा इसी गेट के क्षेत्र में है. यह गेट खुल जाने के बाद अब पर्यटक कूनो नेशनल पार्क को ठीक तरीके से घूम सकेंगे और विदेशी सरजमीं से लाकर यहां बसाए गए चीतों का भी करीब से दीदार कर सकेंगे. इसके साथ ही टिकटोली इलाके के वन्यजीव, नदी, झरने और आकर्षक नजारों का लुत्फ़ उठा सकेंगे.
चीतों की शिफ्टिंग से पहले उनकी सुरक्षा से जुड़े कारणों के चलते कूनो नेशनल पार्क के मुख्य टिकटोली गेट को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया था. इस वजह से कूनों की सैर पर जाने वाले पर्यटकों को अभी तक श्योपुर से करीब 170 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा था.
इसके बाद वे शिवपुरी जिले की सीमा से सटे अहेरा गेट या इतनी ही दूरी के अगरा इलाके के पीपलवाबड़ी गेट से कूनो आते थे. लेकिन, अब टिकटोली के मेन गेट को खोल दिए जाने के बाद पर्यटकों को केवल 80 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ेगा. इस गेट से प्रवेश मिलने के बाद पर्यटक चीतों के लिए बनाए गए बड़े और क्वारंटाइन बाड़ों के बिल्कुल नजदीक तक जा सकेंगे, वे उन्हें बारीकी से देख सकेंगे.
कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ थिरुकुलार आर ने aajtak को फोन कॉल पर बताया, आज 31 दिसंबर से कूनो का टिकटोली गेट पर्यटन के लिये खोल दिया गया है. पर्यटक टिकटोली गेट से प्रवेश कर सकेंगे. पर्यटन के लिए इस गेट पर प्रवेश पत्र सुबह 7 बजे से 9 बजे के बीच प्राप्त किए जा सकेंगे. प्रात: कालीन प्रवेश पत्र 11.30 बजे तक वैध होंगे. शाम के भ्रमण के लिए प्रवेश पत्र 3 बजे से 4 बजे के मध्य प्राप्त किए जा सकेंगे जो कि शाम 6 तक वैध होंगे. प्रत्येक बुधवार को सायंकाल अवकाश रहेगा.
बता दें कि कूनो नेशनल पार्क में वर्तमान में 14 वयस्क और एक शावक चीता मौजूद है. इनमें 7 नर चीते गौरव, शौर्य, वायु, अग्नि, पवन, प्रभाष और पावक शामिल हैं, जबकि 7 मादा चीता में आशा, गामिनी, नाभा, धीरा, ज्वाला, निरवा और वीरा शामिल है. इनमें से अभी केवल दो चीता ही खुले जंगल में मौजूद है, जो भ्रमण के लिए आने वाले पर्यटकों को दिख सकते हैं. जबकि शेष सभी चीते अभी बड़े बाड़े में ही रखे गए हैं.
