भोपाल। मप्र विधानसभा में सोमवार को नारी शक्ति और महिला आरक्षण के मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू करने का शासकीय संकल्प प्रस्तुत किए जाने के बाद, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला। संकल्प का समर्थन करते हुए कृष्णा गौर ने कहा कि यह केवल एक विधेयक नहीं है, बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकार और सम्मान से जुड़ा ऐतिहासिक कदम है।
उन्होंने कांग्रेस पर प्रहार करते हुए कहा, “जब संसद में महिला सशक्तिकरण के लिए संशोधन विधेयक लाया गया था, तब पूरे देश की महिलाओं को उम्मीद जगी थी। लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने मनगढ़ंत और तर्कहीन कारणों से इसे रोका। यह सिर्फ एक विधेयक को गिराना नहीं, बल्कि करोड़ों महिलाओं के मान-सम्मान पर प्रहार था।” स्वयं को ओबीसी वर्ग की महिला बताते हुए श्रीमती गौर ने कांग्रेस की दलीलों को खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कांग्रेस ने हमेशा भ्रम फैलाया है और इस वर्ग का कभी वास्तविक समर्थन नहीं किया।
उन्होंने (जहाँ अधिकार है, वहाँ उपचार है) के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्ज्वला, पीएम आवास, और ड्रोन दीदी जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को असल मायने में सशक्त बनाया है। अपने संबोधन के अंत में गौर ने बेहद कड़े शब्दों में विपक्ष को चेतावनी दी। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा: “द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण कौरवों को समझाने गए थे, लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी और परिणाम महाभारत के रूप में सामने आया। आज फिर एक यदुवंशी मोहन (मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव) आपको समझाने की कोशिश कर रहे हैं। यदि आप अब भी नहीं समझे, तो परिणाम वैसा ही होगा। देश की महिलाएं आपको कभी माफ नहीं करेंगी।”
श्रीमती गौर ने राजा राममोहन राय, ज्योतिराव फुले और डॉ. अंबेडकर जैसे समाज सुधारकों के योगदान को याद करते हुए विपक्ष से अपील की कि वे इस संकल्प का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि नारी हित में दिया गया सहयोग ही भविष्य में लोकतंत्र को अधिक समावेशी और मजबूत बनाएगा।
