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MP: दिव्यांग कारसेवक की पीएम मोदी से अपील, करवा दें रामलला के दर्शनों की व्यवस्था

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भोपाल ,

अयोध्या में 22 जनवरी को भव्य राम मंदिर में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होने जा रहा है. यह हर सनातनी के लिए गर्व का क्षण हैं. वर्षों के बाद राम लला अपने मंदिर में विराजित होने जा रहे हैं. ऐसे में कारसेवकों का भी उत्साह चरम पर है. उनका लंबा संघर्ष अब साकार हो गया है. ऐसे में कारसेवा के दौरान दिव्यांग हुए मध्य प्रदेश के एक शख्स ने पीएम मोदी के राम लला के दर्शन लाभ कराने की भावुक अपील की है.

30 साल की उम्र में निकले थे कारसेवा करने
6 दिसंबर 1992 का वो दिन, जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का सपना लिए हजारों रामभक्त अयोध्या उमड़े थे. तब उन हजारों की भीड़ में राम मंदिर निर्माण का सपना लिए भोपाल के अचल सिंह मीना भी वहां पहुंचे थे. उस वक्त उनकी उम्र करीब 30 साल थी.

अचल सिंह मीना विवादित ढांचे को गिराने के लिए ऊपर चढ़ गए थे. थोड़ी देर बाद जब ढांचा गिरा, तो उसका एक हिस्सा अचल सिंह की पीठ पर गिरा और वो दिव्यांग हो गए. इसके बाद अचल सिंह मीणा भोपाल के पास स्थित एक गांव में गुमनामी की जिंदगी बिताने पर मजबूर हैं.

इस हादसे के बाद गुमनामी में खो गए अचल सिंह
राम जन्मभूमि आंदोलन का सबसे बड़ा फायदा बीजेपी को हुआ. जो कभी 2 सीटों वाली राजनीतिक पार्टी थी, वो आज केंद्र में और देश के ज्यादातर राज्यों में सरकार चला रही है. मगर, इस आंदोलन में कई चेहरे ऐसे थे जो गुमनाम होकर रह गए. ‘आजतक’ आपको बताएगा एक ऐसे ही एक कारसेवक की कहानी, जो अयोध्या गया तो अपने दोनों पैरों पर था. मगर, जब वापस आया, तो दूसरों के सहारे चलकर और अब जिंदगी भर के लिए बिस्तर पकड़ चुका है. ये कहानी है उस कारसेवक की है, जिसने अयोध्या में राम मंदिर की चाह में अपना पूरा जीवन लगा दिया.

राम मंदिर बनने की खुशी, दर्शन लाभ की इच्छा
ये कहानी है अचल सिंह मीणा की जो 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचे को गिराते हुए ऐसे जख्मी हुए कि अब जिंदगीभर के लिए दूसरों की मदद के बिना बिस्तर तक नहीं छोड़ सकते हैं. जब अचल सिंह मीणा से मिलने ‘आजतक’ उनके गांव पहुंचा, तो पाया कि अचल की आंखों में राम मंदिर बनने की खुशी थी.

आजतक से बात करते हुए अचल सिंह मीणा ने इच्छा जताई है कि रामलला के दर्शन और अयोध्या में जाने का उनका सपना पूरा हो. इसके लिए अचल सिंह मीणा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम मोहन से गुहार लगाई है कि 22 जनवरी के बाद ही सही, लेकिन एक बार उसे रामलला के दर्शनों का लाभ करा दें.

कमर के नीचे के हिस्से ने काम करना किया बंद
3 दिसंबर 1992 को अचल तब 30 साल के थे. तब बजरंग दल के जिला संयोजक और वर्तमान में भोपाल की कोलार सीट से विधायक रामेश्वर शर्मा के साथ भोपाल से पुष्पक एक्सप्रेस में बैठकर लखनऊ और फिर वहां से फैजाबाद पहुंचे थे. 6 दिसंबर को बाबरी विध्वंस के दौरान गुंबद के एक हिस्से का मलबा अचल की पीठ पर गिरा और कमर के नीचे के पूरे हिस्से ने काम करना बंद कर दिया. अचल को पहले फैजाबाद में भर्ती करवाया और उसके बाद गांधी मेडिकल कॉलेज लखनऊ ले गए, जहां उसे होश आया. तब से वो चल नहीं सकते.

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