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Thursday, March 5, 2026
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ट्रेन के टॉयलेट में आधे घंटे तक फंसी रही महिला, रेलवे ने नहीं मानी गलती तो उपभोक्ता फोरम ने ठोका 40 हजार का हर्जाना

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भोपाल:

राजधानी भोपाल में उपभोक्ता आयोग ने रेलवे को एक यात्री को 40 हजार रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया है। यह आदेश फोरम ने ट्रेन में यात्रा के दौरान हुई असुविधा के कारण दिया है। एक यात्री ने शिकायत की थी कि उसकी पत्नी ट्रेन के टॉयलेट में आधे घंटे तक फंसी रही थी। रेलवे ने पहले तो यात्री को यात्री मानने से ही इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में अदालत ने रेलवे को सेवा में कमी का दोषी पाया।

दरअसल, भोपाल के रविदास नगर के उमेश पांडेय ने भारतीय रेल प्रबंधक के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 20 अप्रैल 2022 को वे त्रिकुल एक्सप्रेस के थर्ड AC कोच में कन्याकुमारी से भोपाल आ रहे थे। उनके साथ उनका परिवार भी था। उमेश पांडेय ने शिकायत में बताया कि उनकी बर्थ फटी हुई थी और टॉयलेट की सीट भी टूटी हुई थी। उनकी पत्नी जब टॉयलेट गईं तो दरवाजा अंदर से बंद हो गया। उनके पास मोबाइल भी नहीं था, इसलिए वे करीब आधे घंटे तक टॉयलेट में फंसी रहीं। बाद में, सहयात्रियों की मदद से उन्हें बाहर निकाला गया।

रेलवे ने यात्री मानने से किया था इनकार
उमेश पांडेय ने रेलवे में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग भोपाल में शिकायत की। सुनवाई के दौरान रेलवे ने अजीब तर्क दिए। पहले तो रेलवे ने शिकायतकर्ता को यात्री मानने से ही इनकार कर दिया। फिर रेलवे ने कहा कि टिकट में सिर्फ यात्रा करने का अधिकार मिलता है, सुविधाओं का नहीं। रेलवे ने यह भी कहा कि टॉयलेट की सुविधा मुफ्त होती है, इसलिए इस मामले को खारिज कर दिया जाना चाहिए। रेलवे ने यह भी कहा कि शिकायत मिलने के बाद मदुरई स्टेशन पर मैकेनिक ने टॉयलेट सीट को ठीक करने की कोशिश की, लेकिन वह समय पर ठीक नहीं हो सका। रेलवे का कहना था कि ट्रेन को ज्यादा देर तक नहीं रोका जा सकता था।

40 हजार रुपए का जुर्माना लगाया
हालांकि, उपभोक्ता आयोग ने रेलवे के इन तर्कों को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि रेलवे ने सेवा में कमी की है और इसके लिए उसे हर्जाना देना होगा। आयोग ने रेलवे को आदेश दिया कि वह उमेश पांडेय को 40 हजार रुपये का हर्जाना दे। इस मामले में उपभोक्ता आयोग ने रेलवे के रवैये पर सख्त टिप्पणी की। आयोग ने कहा कि रेलवे यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए जिम्मेदार है। अगर रेलवे अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहता है, तो उसे हर्जाना देना होगा।

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