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‘हताश हैं, जान पर खतरे से डरे हुए हैं…’, गोपाल कांडा के बरी होने पर क्या बोले गीतिका के घर वाले

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नई दिल्ली,

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को एयर होस्टेस गीतिका शर्मा सुसाइड केस में बड़ा फैसला सुनाा है. कोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल कांडा को बरी कर दिया है. विशेष जज विकास ढुल की कोर्ट ने गोपाल कांडा और उनकी सहयोगी अरुणा चड्ढा को आत्महत्या के लिए उकसाने, आपराधिक साजिश, सबूत नष्ट करने और जालसाजी समेत सभी आरोपों से बरी कर दिया है.

कोर्ट ने गोपाल कांडा को एक लाख रुपये का निजी मुचलका जमा करने और यदि पुलिस बरी होने के खिलाफ अपील दायर करती है तो उपस्थित रहने के लिए कहा है. कोर्ट का फैसला आने के बाद मंगलवार को गीतिका के भाई अंकित कुमार ने कहा, 11 साल तक हमारा परिवार भावनात्मक रूप से उतार-चढ़ाव से गुजरता रहा है. आज दिल्ली की कोर्ट के फैसले से हम लोग टूट गए हैं. निराशा हाथ लगी है. मेरे 66 साल के पिता जी सदमे की स्थिति में हैं. हमारा परिवार आगे केस लड़ने की स्थिति में नहीं हैं. अंकित ने राज्य सरकार से कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर करने की मांग की है. उन्होंने अपनी जान का खतरा होने का भी दावा किया है.

गोपाल कांडा को देना पड़ा था मंत्री पद से इस्तीफा
बता दें कि गोपाल कांडा की MLDR एयरलाइंस में गीतिका शर्मा एयर होस्टेस की जॉब करती थीं. गीतिका 5 अगस्त 2012 को उत्तर-पश्चिम दिल्ली में अशोक विहार स्थित आवास पर मृत पाई गईं थीं. इससे पहले 4 अगस्त को अपने सुसाइड नोट में गीतिका ने कहा था- वो कांडा और अरुणा चड्ढा के ‘उत्पीड़न’ के कारण अपनी जिंदगी खत्म कर रही हैं. मामले में कांडा के खिलाफ FIR दर्ज हुई, जिसके बाद उन्हें गृह राज्य मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था. गीतिका की आत्महत्या के छह महीने बाद उनकी मां ने भी सुसाइड कर लिया था.

‘यह हमारे जीवन के लिए खतरनाक स्थिति’
अंकित ने फोन पर बताया, यह केस हमारे लिए भावनात्मक रूप से उथल-पुथल भरा रहा है. यह 11 साल की लंबी लड़ाई रही है. अब यहां तक ​​पहुंची है. हम अब अपनी जिंदगी को लेकर डरे हुए हैं. परिवार सहमा हुआ है. यह हमारे लिए जीवन के लिए खतरनाक स्थिति है.

‘1800 पन्नों की चार्जशीट में कोई सबूत नहीं?’
दिल्ली की स्पेशल कोर्ट के विकास ढुल ने मामले में सह-आरोपी अरुणा चड्ढा को भी बरी कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में विफल रहा है. इस संबंध में कांडा के प्रभावशाली नेता होने को लेकर सवाल किए जाने पर अंकित ने कहा, ऐसा कैसे है कि 1800 पन्नों की चार्जशीट में कोई सबूत नहीं था? आईटी अधिनियम, जालसाजी, आत्महत्या के लिए उकसाना जैसे सभी आरोप हटा दिए गए. इन सबूतों में साफ था कि कांडा ने मेरी बहन को परेशान किया था. अगर सबूतों की कोई कमी थी तो अदालत ने किसी जांच का आदेश क्यों दिया?

‘सबूतों की कोई कमी नहीं थी’
अंकित ने कहा, सबूतों की कोई कमी नहीं थी, बल्कि विचार की कमी थी. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वह राजनीतिक पावरफुल हैं. राजनीतिक मदद हासिल करते हैं. कोर्ट का यह फैसला बेहद चौंकाने वाला है. उन्होंने कहा कि चार्जशीट में उत्पीड़न के सबूत थे. आरोप लगाया कि कोर्ट ने इस फैक्ट पर ध्यान नहीं दिया कि कुछ गवाहों को विदेश भेजा गया था.

‘अपील करने के लिए पैसे की तंगी’
उन्होंने दावा किया, सीसीटीवी फुटेज, लैपटॉप जैसे सबूत थे, जिन्हें नष्ट कर दिया गया. कोर्ट ने उनके नष्ट होने पर सवाल क्यों नहीं उठाया? क्या किसी जांच के आदेश दिए गए थे? ऐसे सबूत थे, जिन पर विचार नहीं किया गया. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे फैसले के खिलाफ अपील करेंगे तो उन्होंने कहा कि उनके पास इतने पैसे नहीं है.

‘गोपाल कांडा से दिल्ली के वकील प्रभावित’
अंकित बताते हैं कि वो एक निजी कंपनी में काम करते हैं. हम मिडिल क्लास फैमिली से हैं. हम एक वकील का खर्च नहीं उठा सकते हैं. मैं राज्य सरकार से फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का अनुरोध करूंगा. उन्होंने कहा, दिल्ली में ऐसा कोई वकील नहीं है जो गोपाल कांडा से प्रभावित ना हो? अगर राज्य लड़ाई लड़ता है तो बेहतर होगा. अंकित ने निराश होकर कहा, आप देखेंगे कि वो (कांडा) जल्द ही चुनाव लड़ेंगे और एक नेता के रूप में लौटेंगे. हमारे देश में यही स्थिति है.

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