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अधिकारों के लिए लड़ें, जिसकी आप हकदार हैं… राहुल गांधी ने महिलाओं को बताया ‘शक्ति अभियान’ का मकसद

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नई दिल्ली:

कांग्रेस राजनीति में महिला नेतृत्व को लेकर हमेशा से प्रयासरत रही है। देश में महिला शक्ति को राजनीति में आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस ने जिस शक्ति अभियान-इंदिरा फेलोशिप की शुरुआत की थी, उसकी दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यकारिणी चल रही है। इसके पहले दिन राहुल गांधी इसमें भाग लेने के लिए जवाहर भवन पहुंचे, जहां उन्होंने देशभर से आईं महिला नेताओं के साथ गहन विचार-विमर्श किया। ये महिलाएं 21 राज्यों से आई थीं और ये सभी प्रतिभागी अपने-अपने क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली महिलाएं थीं, जिन्होंने जमीनी स्तर पर महिलाओं के सामने आने वाली पितृसत्ता की गहरी चुनौतियों का सामना करने की प्रतिबद्धता जताई।

उल्लेखनीय है कि इंदिरा फेलोशिप द्वारा संचालित शक्ति अभियान एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका मकसद भारतीय राजनीति में महिलाओं के समान प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करना है। यह आंदोलन ग्रामीण और शहरी समुदायों की बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को चुनाव लड़ने, नेतृत्व की भूमिका निभाने और स्थानीय और राष्ट्रीय शासन में गहरे पितृसत्तात्मक मानदंडों को चुनौती देने के लिए सशक्त बनाता है।

‘हमारी लड़ाई सिर्फ सत्ता के लिए नहीं है’
आयोजन के पहले दिन महिलाओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आज राजनीति में संघर्ष सिर्फ पारंपरिक विपक्षी दलों के खिलाफ नहीं, बल्कि एक व्यापक वैचारिक लड़ाई है। राहुल का कहना था कि आज राजनीति में हमारी लड़ाई सिर्फ सत्ता के लिए नहीं है, बल्कि प्रतिनिधित्व के लिए भी है, ये दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने महिलाओं को प्रतीकात्मक पदों को अस्वीकार करने और सार्थक प्रभावशाली स्थानों के लिए संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया।

‘…बल्कि अपने अधिकारों के लिए लड़ें’
राहुल ने कहा कि महिलाओं को यह समझना चाहिए कि वे केवल सांकेतिक राशि या पदों को स्वीकार न करें, बल्कि अपने अधिकारों के लिए लड़ें, जिनकी वे हकदार हैं। दो दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में प्रतिभागियों ने अपने जमीनी अनुभवों को साझा किया और सामाजिक प्रतिरोध, संसाधनों की कमी और राजनीतिक ढांचे में पितृसत्ता की चुनौतियों पर चर्चा की।

शक्ति अभियान का क्या मकसद?
गौरतलब है कि शक्ति अभियान के मुख्य मांगें हैं- समान राजनीतिक भागीदारी, जिसमें सभी स्तर के निर्वाचित कार्यालयों में उनकी भागीदारी 50 फीसदी सुनिश्चित हो। इसके लिए नीतिगत सुधार किए जाएं। महिला नेताओं के लिए वित्तीय और प्रशासनिक समर्थन, जिसमें महिलाओं के सामने आने वाली प्रणालीगत बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष संसाधनों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन हो, सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा, कार्यालय में रहते हुए महिला नेताओं को उत्पीड़न, हिंसा और धमकी से सुरक्षा प्रदान की जाए, नीति-निर्माण में महिला नेतृत्व की मान्यता, इसमें हाशिए पर पड़े समुदायों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर महिलाओं की आवाज को नीतियों के निर्माण में जगह देने की कोशिश प्रमुख हैं।

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