14.7 C
London
Wednesday, May 13, 2026
Homeराष्ट्रीयजबरन धर्म परिवर्तन देश की सुरक्षा को खतरा, सरकार क्या कदम उठाएगी...

जबरन धर्म परिवर्तन देश की सुरक्षा को खतरा, सरकार क्या कदम उठाएगी तुरंत बताए: सुप्रीम कोर्ट

Published on

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जबरन परिवर्तन गंभीर समस्या है और इससे देश की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी करते हुए केंद्र सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब 22 नवंबर तक हलफनामा देने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने 23 सितंबर को याचिका दाखिल की थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से जबरन और धोखा देकर धर्म परिवर्तन रोकने के लिए सख्त कानूनी प्रावधान लाने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश दिए जाने की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जबरन धर्म परिवर्तन गंभीर मुद्दा
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस हीमा कोहली ने सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी में कहा कि जबरन धर्म परिवर्तन न सिर्फ देश की सुरक्षा को बल्कि नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता को भी प्रभावित करता है। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी में यह भी कहा कि यह बेहद गंभीर मुद्दा है और केंद्र सरकार को इस मामले में दाखिल याचिका पर अपना स्टैंड क्लियर करे। केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने 22 नवंबर तक एफिडेविट दाखिल करने को कहा है।

केंद्र सरकार से मांगा हलफनामा
सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान कहा कि जो मुद्दे उठाए गए हैं और जबरन धर्म परिवर्तन के जो आरोप लगाए गए हैं, अगर वो सही हैं और उनमें सच्चाई है तो फिर यह गंभीर विषय है और इससे आखिरकार देश की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इससे देश की जनता के ‘धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार’ प्रभावित होते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार को इस मामले में स्टैंड क्लियर करना चाहिए। इसलिए केंद्र सरकार हलफनामा देकर बताए कि वह कथित जबरन धर्म परिवर्तन रोकने के लिए क्या कदम उठा रहा है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह इस मामले की अगली सुनवाई 28 नवंबर को करेगा। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कई राज्य सरकारों ने इसे रोकने के लिए कानून बनाए हैं। उन्होने यह भी कहा कि कई उदाहरण हैं जहां चावल और गेंहू देकर धर्म परिवर्तन कराए जा रहे हैं। तब बेंच ने कहा कि आप बताएं कि आप क्या कदम उठा रहे है।

सभी राज्यों को बनाया प्रतिवादी
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता ने अर्जी दाखिल कर केंद्र और तमाम राज्यों को प्रतिवादी बनाया है। तामिलनाडु में 17 साल की लड़की की मौत के मामले में छानबीन की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने अपनी अर्जी में कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 14, 21 एवं 25 के तहत धोखाधड़ी, धमकी या डराकर धर्म परिवर्तन कराया जाना अपराध घोषित किया जाए। याचिका में नैशनल इन्वेस्टिंग एजेंसी (NIA), सीबीआई (CBI) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को 17 साल की लड़की की मौत के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी में कहा गया है कि दबाव बनाकर कराए जाने वाले अवैध धर्म परिवर्तन को संविधान के तहत अपराध घोषित किया जाए।

याचिका में तमिलनाडु की लड़की के मामले का हवाला
याचिकाकर्ता ने कहा कि 19 जनवरी को तामिलनाडु में 17 साल की लड़की ने आत्महत्या कर ली है। याची ने कहा कि लड़की ने मरने से पहले लिखे नोट में कहा है कि उसे धर्म परिवर्तन करने के लिए उस पर दबाव बनाया गया। उपाध्याय ने याचिका में मांग की है कि प्रलोभन देकर, दबाव बनाकर या फिर धमकी देकर धर्म परिवर्तन कराए जाने को संविधान के खिलाफ बताते हुए सख्त कदम उठाए जाएं। लॉ कमीशन को कहा जाए कि धर्म परिवर्तन को कंट्रोल करने के लिए रिपोर्ट पेश करे ताकि जबरन और धमकी और बहला फुसलाकर धर्म परिवर्तन मामले में कानून लाया जाए। प्रलोभन या जबरन धर्म परिवर्तन एक गंभीर विषय है।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की दलीलों से जताई सहमति
सुप्रीम कोर्ट ने भी याचिका में दी गई दलीलों से सहमत होकर जबरन धर्मपरिवर्तन को गंभीर विषय माना और केंद्र सरकार से कहा है कि अगर यह सच है तो वह इसे रोकने के लिए गंभीरता से कदम उठाए। उच्चतम न्यायालय ने सरकार को चेतावनी भी दी कि यह एक कठिन स्थिति है जिस पर काबू नहीं पाया गया तो देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा होगा और नागरिकों के ‘धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार’ प्रभावित होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि यह गंभीर विषय है और केंद्र सरकार को एहतियाती कदम उठाने की जरूरत है। आपको कदम उठाना होगा ताकि इसे रोका जा सके। अगर ऐसा नहीं किया गया तो कठिन समय आ जाएगा। आप हमें बताएं कि क्या कदम उठाए जाने हैं और क्या कदम उठाए गए हैं।

इस दौरान तुषार मेहता ने कहा कि दो राज्यों- उड़ीसा और मध्य प्रदेश ने जबरन धर्म परिवर्तन या फिर प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन रोकने के लिए कानून बाए हैं और शीर्ष अदालत उस कानून की वैधता को बरकरार रखा है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि आदिवासी इलाके में जबरन धर्म परिवर्तन हो रहा है। कई बार पीड़ित को पता भी नहीं होता कि क्या हो रहा है।

Latest articles

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से धनंजय तिवारी को मिली 14 हजार से अधिक रुपये की राहत

रायपुर। विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026...

बीएचईएल में नई भर्ती आर्टिजनों के वेतन पुनरीक्षण की मांग, ऐबू ने प्रबंधन को सौंपा ज्ञापन

भोपाल। बीएचईएल भोपाल में नई भर्ती कामगारों (आर्टिजनों) के हितों और वेतन विसंगतियों को...

उद्यमशीलता से प्रवासी राजस्थानियों ने देश-विदेश में बनाई अलग पहचान : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

जयपुर। भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रवासी राजस्थानियों ने अपनी उद्यमशीलता, मेहनत और दूरदर्शिता...

विज्ञान, तकनीक और नवाचार ही विकास का वास्तविक माध्यम : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

जयपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में भजनलाल शर्मा...

More like this

नीट यूजी 2026 की परीक्षा रद्द, 3 मई को हुई थी आयोजित, पेपर लीक के बाद NTA ने लिया फैसला

नई दिल्ली। नीट यूजी (NEET UG) परीक्षा 2026 से जुड़ी इस वक्त की बड़ी...

पश्चिम एशिया संकट का असर: परियोजनाओं की समय-सीमा प्रभावित, वित्त मंत्रालय ने ‘फोर्स मेज्योर’ के तहत दी राहत

नई दिल्ली/भोपाल। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला...

शुभेंदु अधिकारी पीए हत्याकांड में बंगाल पुलिस ने बलिया के राज सिंह को किया गिरफ्तार, चुनाव लड़ चुका है आरोपी

बलिया। बलिया का नाम पश्चिम बंगाल के चर्चित शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (पीए)...