नई दिल्ली
मॉनसून सत्र में संसद के भीतर काम नहीं, हंगामा चल रहा है। बीच-बीच में थोड़ी देर के लिए कार्यवाही चलती है तो नोक-झोंक हो जाती है। राज्यसभा में मंगलवार को कई बार ऐसे मौके आए। दरअसल, विपक्षी दल संसद में मणिपुर हिंसा के मसले पर चर्चा की मांग कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में बयान दें। मंगलवार दोपहर को स्थगन के बाद कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने यही मांग उठाई। सभापति जगदीप धनखड़ ने मांग ठुकरा दी। नारेबाजी के बीच सभापति ने सदस्यों को प्रश्नकाल का महत्व समझाने की कोशिश की। इसी बीच, कांग्रेस नेता पी चिदंबरम की एक बात सभापति को चुभ गई। सभापति धनखड़ नाराजगी जाहिर करते हुए बोले, ‘मिस्टर चिदंबरम, वह एडवोकेट हैं, सदन के वरिष्ठ सदस्य हैं, आज उन्होंने मुझसे मुखातिब होते हुए कहा- How can you do it?’ सभापति और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बीच में भी चुटीली बहस हुई।
चिदंबरम की किस बात पर सुनाने लगे सभापति
सभापति ने कहा, ‘हमें अनुशासनहीनता के प्रति जीरो टॉलरेंस रखनी होगी। हमारा अनुशासन अनुकरणीय होना चाहिए।’ इसके बाद कांग्रेस के सदस्यों की ओर से पीएम मोदी के बयान की मांग दोहराई गई। सभापति ने कहा, ‘मिस्टर पी चिदंबरम ने यह मामला उठाया। उन्होंने संसद के अपने समूचे अनुभव का इस्तेमाल करते हुए मुद्दा उठाया। वह मिड 80s में संसद में आए। मैं उस वक्त थोड़ा हैरान हुआ जब उन्होंने कहा, हाउ कैन यू डू इट? इतने अनुभवी व्यक्ति का ऐसी बात करना, मैं उनसे अपील करूंगा कि वे उन तर्कों को देखें जिनके आधार पर मैंने (प्रस्ताव) लौटाया है।’
