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मैं हिंदू हूं, धार्मिक हूं… अयोध्या नहीं जा रहे पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह क्यों कह रहे हैं ऐसा?

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भोपाल

अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में कांग्रेस के बड़े नेता नहीं जा रहे हैं। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह भी प्राण प्रतिष्ठा को लेकर कई सवाल उठा रहे हैं। इस बीच बीजेपी का कहना है कि ये लोग धर्म विरोधी हैं। ऐसे आरोपों के बीच दिग्विजय सिंह ने एक पुराना वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह धर्म और अपने परिवार के लोगों के बारे में बात कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा है कि हमारे सारे बड़े नेता आगे चलकर बिना इवेंट अयोध्या में रामलला के दर्शन करने जाएंगे।

दिग्विजय सिंह ने उस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा है कि मैं हिंदू हूं, मैं धार्मिक हूं ये मेरा नितांत निजी विषय है। अपने धर्म को मानने का तरीका किसी की परेशानी का सबब नही बनना चाहिए। वसुधैव कुटुंबकम् की भावना ही हमारे देश की असली पहचान है। उन्होंने कहा कि मैं उस परिवार से हूं, जो बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति के लोग हैं। हमारा जो स्थान है, उसमें बहुत सारे मंदिर हैं। मेरी मां बहुत धार्मिक प्रवृत्ति की थी। मेरे पिता महात्मा गांधी से प्रभावित थे। उन्होंने मंदिरों में दलितों का प्रवेश कराया था। हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। राघो जी के मंदिर में जो द्वार लगे हैं, उस पर उर्दू में लिखा हुआ है। छात्र जीवन में कभी राजनीति में रुचि नहीं रही है। पिता जी के निधन के बाद में मुझे राजनीति में आना पड़ा है।

दिग्विजय सिंह उस वीडियो में बता रहे हैं कि राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने मुझे जनसंघ ज्वाइन करने के लिए कहा था। कुशाभाऊ ठाकरे मेरे घर पर आए थे। इसी बीच गोविंद नारायण सिंह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उन्हें खबर मिली कि मुझे जनसंघ में ले जाया जा रहा है। उन्होंने मुझे बुलाया और कहा कि अभी तुम कहीं नहीं जाओ। उन्होंने मुझे गुरु गोलवलकर, नेहरू और गांधी जी को पढ़ने की सलाह दी। साथ ही रामधारी सिंह दिनकर की किताब भी पढ़ो। हम बोर्डिंग स्कूल में रहे हैं, वह हिंदू-मुस्लिम सभी रहते थे। हमलोग मंदिर और मस्जिद दोनों जगहों पर जाते थे। इन किताबों को पढ़कर मैं राजमाता के पास गया। उन्हें मना कर दिया कि मैं जनसंघ में नहीं जाऊंगा। इसके साथ ही दिग्विजय सिंह वह वीडियो में यह कह रहे हैं कि कई बार कहा जाता है कि मेरे पिता हिंदू महासभा में रहे हैं। मेरे पिता कभी हिंदू महासभा में नहीं रहे हैं।

इसके साथ ही दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैं कभी आरएसएस में नहीं रहा हूं। नगर पालिका अध्यक्ष रहते हुए इनके एक कार्यक्रम में जरूर गया था। ये लोग मुस्लमानों के बीच कटुता फैलाते हैं। मैं कभी इनकी विचारधारा को स्वीकार नहीं किया है। ऐसे कट्टरपंथी हर धर्म में हैं।

वहीं, दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा है कि यज्ञ, अनुष्ठान में कौन से नियमों का पालन करना है, ये तो सर्वोच्च पद पर आसीन धर्म गुरु ही बता सकते हैं। सनातन धर्म में शंकराचार्य से बड़ा कोई पद नहीं होता। एक नहीं चारों मान्य पीठों के शंकराचार्य शास्त्र सम्मत पूजा विधि की अवहेलना और अधूरे निर्मित मंदिर में भगवान के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा को अनुचित मान रहे हैं। इसीलिए उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने से इंकार कर दिया तो इसमें गलत क्या है?

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