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पैराशूट नेताओं को मंत्री बनाने के बाद BJP में आंतरिक विरोध? 9 बार के MLA गोपाल भार्गव ने कर दिया ये सवाल

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भोपाल

‘मध्य प्रदेश सरकार, दिल्ली से चल रही है। न जाने पार्टी ऐसे निर्णय क्यों ले रही है। हम खुद इतने कद्दावर हैं, कई बार चुनाव जीत चुके, लेकिन पार्टी कांग्रेस से आयातित नेताओं को मंत्रीपद बांट रही है। ऐसे में हम भाजपा वाले कहां जाएंगे, हमारी जनता हमसे जवाब मांग रही है।’ नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर भाजपा के एक कद्दावर विधायक और पूर्व मंत्री ने नवभारत टाइम्स डॉट कॉम से यह बात कही। उन्होंने कहा कि अगर हमने यह बात नाम के साथ कह दी तो क्या पता अगले बार हमारे विधायक का टिकट भी कट जाए।

महाकौशल क्षेत्र की एक विधानसभा के विधायक ने कहा कि पैराशूट नेताओं से भविष्य में कहीं भाजपा को ही नुकसान न उठाना पड़ जाए। अगर ऐसे ही चलते रहा तो कभी कांग्रेस सरकार बनने पर हम भी कांग्रेस में शामिल होकर मंत्री बन जाएंगे? फिर भाजपा का क्या होगा? एक नहीं, कई सीनियर बीजेपी नेता अपनी ही पार्टी के निर्णयों से निराश हो गए हैं। रामनिवास रावत को कैबिनेट मंत्री बनाए जाने के बाद तो यह ‘आंतरिक विद्रोह’ और तेज हो रहा है।

इतने मंत्री बन चुके हैं मोहन सरकार में मंत्री
आपको बता दें कि अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन कैबिनेट की कैबिनेट में 02 उपमुख्यमंत्री, 19 कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) 06 और राज्यमंत्री 04 को मिलाकर कुल कैबिनेट के 32 पद भर चुके हैं। कुल तय क्षमता 35 में सिर्फ 3 पद ही रिक्त हैं। माना जा रहा है कि अमरवाड़ा से चुनाव जीतने के बाद कमलेश शाह को भी मंत्री पद दिया जा सकता है, उसके बाद बचे दो पद इमरजेंसी के लिए रिक्त रखे जाएंगे।

गोपाल भार्गव ने किया सवाल
मीडिया से बातचीत करते हुए प्रदेश के सबसे सीनियर और 9वीं बार के विधायक गोपाल भार्गव ने तो यहां तक कह दिया है कि मैं 15000 दिनों से लगातार विधायक हूं। रावत को मंत्री किस मजबूरी में बनाया गया ये तो शीर्ष नेतृत्व ही बता सकता है। भार्गव ने एक बात और जोड़ते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं में असंतोष की बात तो आप उनसे बात करेंगे तो वो अपने मन की बात आपसे खुद ही कह देंगे।

पाला बदलने वाले कांग्रेसी नेताओं को मिले बड़े विभाग
आपको बता दें कि रावत से पहले ही कांग्रेस से भाजपा में आए कई नेता बड़े-बड़े विभागों का जिम्मा संभाल रहे हैं। डॉ. मोहन यादव के मंत्रिमंडल में ज्योतिरादित्य सिंधिया के चार करीबी ऐदल सिंह कंसाना, गोविंद राजपूत, प्रद्युम्न सिंह तोमर और तुलसीराम सिलावट शामिल हैं। ये कांग्रेस के उन 22 विधायकों में से थे, जो मार्च 2020 में बीजेपी में शामिल हो गए थे, जिसके बाद प्रदेश की कमलनाथ सरकार गिर गई थी। रावत के बाद अब कांग्रेस से आयातित और भाजपा की सरकार में कैबिनेट मंत्रियों की संख्या 5 हो गई है।

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