नई दिल्ली
मणिपुर पर संसद में जारी हंगामे के बीच अब नए बने विपक्षी गठबंधन INDIA के सदस्य मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में हैं. विपक्षी नेताओं का मानना है कि अविश्वास प्रस्ताव सरकार को मणिपुर पर लंबी चर्चा के लिए मजबूर करेगा और इस दौरान पीएम को जवाबदेह ठहराया जाएगा.विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर आम सहमति बन गई है और कम से कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर लेने के लिए हस्ताक्षर अभियान पहले से ही चल रहा है. इस पर अंतिम फैसला बुधवार को सुबह INDIA दलों के सांसदों की बैठक में लिया जा सकता है.
अविश्वास प्रस्ताव का मसौदा तैयार करने में जुटी कांग्रेस
सूत्रों के हवाले से खबर है कि कांग्रेस ने अपने लोकसभा सांसदों को तीन लाइन का व्हिप जारी किया है. इस व्हिप में कहा गया, ‘कांग्रेस पार्लियामेंट्री कमेटी के सभी कांग्रेस लोकसभा सांसदों से अनुरोध है कि वे बुधवार को सुबह साढ़े दस बजे तक संसद भवन स्थित सीपीपी कार्यालय में उपस्थित हों.’ सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी वरिष्ठ कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी को सौंपी गई है.
इंडिया टुडे से बात करते हुए राज्यसभा सांसद और तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि हमारे पास संसद में INDIA दलों के लिए एक रणनीति है. उन्होंने कहा कि हम हर दिन नई रणनीति अपनाते हैं और राजनीतिक स्थिति के अनुसार रणनीति बनाते हैं. उन्होंने कहा, ‘लोकसभा के नियम 198 में अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया बताई गई है. हम इसके तहत काम करेंगे.’
50 सांसदों की जरूरत
सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को नियम 198 के तहत लोकसभा में पेश किया जा सकता है. इस अविश्वास प्रस्ताव को पेश करने के लिए ही करीब 50 विपक्षी सांसदों का समर्थन होना जरूरी है. लोकसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव एक अहम कदम माना जाता है. अगर संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाया जाए और सदन के 51% सांसद अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करते हैं, तो यह पारित हो जाता है और माना जाता है कि सरकार ने बहुमत खो दिया है और उसे पद से इस्तीफा देना होगा. सरकार को या तो विश्वास मत लाकर सदन में अपना बहुमत साबित करना होता है या विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाने के बाद सरकार से बहुमत साबित करने के लिए कह सकता है.
हालांकि यह जरूरी नहीं है कि विपक्षी दल सिर्फ सरकार गिराने के उद्देश्य से ही अविश्वास प्रस्ताव पेश करते हैं, कई बार विपक्ष सरकार को राष्ट्रीय महत्व के किसी मुद्दे पर चर्चा करने के लिए मजबूर करने के लिए भी अविश्वास प्रस्ताव लाता है.
प्रस्ताव लाने का नियम क्या?
जो भी सांसद सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाता है उसे ऐसा प्रस्ताव देने के लिए सदन की अनुमति मांगनी होगी और जिस दिन वह प्रस्ताव लाएगा उस दिन सुबह 10 बजे तक लोकसभा के महासचिव को प्रस्ताव की लिखित सूचना देनी होगी.
मणिपुर के मुद्दे पर पीएम का बयान चाहता है विपक्ष
आपको बता दें कि विपक्ष मणिपुर की स्थिति पर संसद के दोनों सदनों में प्रधानमंत्री के बयान और उसके बाद चर्चा की मांग कर रहा है. लेकिन संसद का मानसून सत्र को आज चार दिन बीत गए लेकिन मणिपुर के मुद्दे पर अब तक कोई सार्थक चर्चा हो नहीं सकी है. सरकार भी इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है कि वे चर्चा को तैयार हैं. सरकार का कहना है कि विपक्ष हंगामा कर रहा है और सदन नहीं चलने दे रहा.
- इससे पहले आज, केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि उन्होंने गतिरोध को हल करने के लिए विपक्ष को पत्र लिखा है। शाह ने लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी और राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखा। उन्होंने मणिपुर पर चर्चा की बात कही। शाह ने इस दौरान लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से भी मुलाकात की।
- अमित शाह ने विपक्ष को लिखे अपने पत्र को ट्वीट भी किया। इसके कैप्शन में लिखा है, “सरकार मणिपुर के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और पार्टी लाइन से ऊपर उठकर सभी पार्टियों से सहयोग चाहती है। मुझे उम्मीद है कि सभी पार्टियां इस महत्वपूर्ण मुद्दे को सुलझाने में सहयोग करेंगी।”
- गुरुवार को संसद का मानसून सत्र शुरू होने के बाद से विपक्ष के विरोध के कारण दोनों सदनों में विधायी कामकाज रुका हुआ है। आज भी विधायी मोर्चे पर कोई प्रगति नहीं होने के कारण संसद के दोनों सदनों को स्थगित कर दिया गया।
- हालांकि, हंगामे के बीच बहु-राज्य सहकारी सोसायटी (संशोधन) विधेयक ध्वनि मत से पारित हो गया। विधेयक पेश करते समय विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच शाह ने कहा, “जो लोग नारे लगा रहे हैं, उन्हें न तो सहयोग में रुचि है, न ही सहकारी समितियों में, न ही दलितों में और न ही महिला कल्याण में।”
- राज्यसभा सदस्य और तृणमूल सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने ट्वीट किया कि विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का माइक बंद कर दिया गया है। उनके ट्वीट में लिखा था, “हर भारतीय पार्टी विरोध में बाहर चली गई।”
- विपक्ष सदन में इस विषय पर चर्चा से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हिंसा प्रभावित मणिपुर पर बयान की मांग कर रहा है।
- मणिपुर हिंसा को लेकर पीएम के बयान की मांग तब और बढ़ गई जब मणिपुर से एक वीडियो सामने आया, जिसमें दो महिलाओं को भीड़ द्वारा निर्वस्त्र कर घुमाया गया।
- वहीं सरकार भी अपने रवैये पर डटी हुई है। सूत्रों ने कहा कि सरकार की योजना इस सत्र के लिए निर्धारित कई विधेयकों को पारित कराने को लेकर उन पर ध्यान केंद्रित करने की है।
- वहीं आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के निलंबन को लेकर विपक्षी दलों ने सोमवार रात भर विरोध प्रदर्शन किया। उनके हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था, “मणिपुर के लिए I.N.D.I.A.” सिंह को कल राज्यसभा में विपक्ष के विरोध के दौरान निलंबित कर दिया गया था।
- इससे पहले केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने बार-बार होने वाले व्यवधानों पर वरिष्ठ विपक्षी नेताओं के साथ टेलीफोन पर बातचीत की और उनसे संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से सुनिश्चित करने की अपील की।
