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पातालकोट एक्सप्रेस में आगः गेटमैन यशपाल न होते तो जाने क्या होता? सूझबूझ ने बचा ली सैकड़ों की जान

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आगरा

उत्तर प्रदेश के आगरा में भांडई स्टेशन के पास पातालकोट एक्सप्रेस में आग लगने से 11 यात्री झुलस गए। पैसेंजर्स से ठसाठस भरी ट्रेन में आग लगने के बाद यात्रियों ने खिड़की से कूदकर जान बचाई। हादसे में किसी के जान जाने की खबर नहीं है। रेलवे और स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी से हादसे ने विकराल रूप नहीं लिया। हालांकि, प्रशासन के लिए भी यह सिर्फ इसलिए संभव हो पाया, क्योंकि रेलवे गेटमैन यशपाल ने समय रहते समझदारी दिखाई। उनकी सूझबूझ से ही पातालकोट एक्सप्रेस का यह हादसा बड़ा हादसा नहीं बन पाया और उससे पहले ही स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया।

क्या हुआ था?
दरअसल, पंजाब के फरीदकोट से मध्य प्रदेश के सियोनी जा रही पातालकोट एक्सप्रेस में उस वक्त आग लग गई जब वह आगरा से 10 किमी दूर भांडई स्टेशन पहुंची थी। ट्रेन की दो जनरल बोगियों में आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए जहां से जगह मिली, वहीं से ट्रेन से बाहर आने लगे। कई लोगों ने खिड़की से कूदकर अपनी जान बचाई। इस हादसे की चपेट में आने से 11 लोग घायल हो गए। हालांकि, यह आंकड़ा और भयावह हो सकता था, अगर रेलवे गेटमैन ने समय रहते समझदारी न दिखाई होती।

सेना से रिटायर्ड गेटमैन यशपाल सिंह उस समय रेलवे फाटक नंबर 487 पर तैनात थे। यशपाल ने बताया कि ट्रेन की चौथी बोगी से उन्होंने धुआं उठता देखा। हालांकि, ट्रेन में मौजूद किसी यात्री को इसकी भनक भी नहीं थी। उन्होंने तुरंत मामला भांप लिया और तत्काल इसकी सूचना स्टेशन मास्टर हरिदास को दी। स्टेशन मास्टर ने सतर्कता दिखाते हुए ट्रेन के दोनों डिब्बों की इलेक्ट्रिक सप्लाई काट दी। फिर दोनों कोचेज को ट्रेन से अलग कर दिया गया।

उस समय इन दो बोगियों में 150 से ज्यादा यात्री सवार थे। ट्रेन रुकने के बाद सभी तेजी से बाहर भागने लगे। जिसे जहां से जगह मिली, वहीं से भागा। कई लोग तो खिड़की के रास्ते ट्रेन से बाहर कूद गए। फायर ब्रिगेड, ऐंबुलेंस और आरपीएफ की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू भी पा लिया गया। इस हादसे में 11 लोग झुलस गए। हालांकि, गनीमत रही कि किसी यात्री की जान को नुकसान नहीं पहुंचा।

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