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‘सैनिकों को कई सुविधाएं, अग्निवीर को कुछ भी नहीं…’, कांग्रेस ने फिर लगाया बीजेपी पर झूठ बोलने का आरोप

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नई दिल्ली,

संसद सत्र में ‘अग्निवीर योजना’ की प्रासंगिकता पर सवाल उठने के साथ ही केंद्र सरकार की यह स्कीम लगातार लगाार विवाद का विषय बनी हुई है. चर्चा इस पर भी हो रही है कि मरणोपरांत एक ‘अग्निवीर’ को सरकार की तरफ से कितनी सहायता राशि मिलती है या फिर मिली है.

कांग्रेस लगातार इस मुद्दे को हवा दे रही है और इस मामले में बीजेपी और कांग्रेस लगातार एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं. कांग्रेस ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि अग्निवीर मुद्दे पर रक्षामंत्री ने संसद में झूठ बोला है. कांग्रेस के सैनिक विभाग के चेयरमैन रिटायर्ड कर्नल रोहित चौधरी ने ये आरोप लगाए और अपनी ओर से इनके संबंध में कुछ तथ्य भी रखे.

रक्षामंत्री पर लगाए झूठ बोलने के आरोप
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया था कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में शहीद अग्निवीरों के परिवारों को मुआवजे के मुद्दे पर “झूठ” बोला था. उन्होंने कहा कि इसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए. इस मामले में भारतीय सेना के एडीजी पीआई का बयान सामने आया था. इसमें कहा गया था कि सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट से पता चला है कि अग्निवीर अजय कुमार के परिजनों को मुआवजा नहीं दिया गया है, जिन्होंने ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवा दी थी. बता दें कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के ऑफिस की ओर से ADG PI के पोस्ट को रीपोस्ट किया गया था.

दावा, अग्निवीर अजय सिंह के परिवार को मिले 98.39 लाख रुपये
एडीजी पीआई ने कहा कि इस बात पर जोर दिया जाता है कि इंडियन आर्मी अग्निवीर अजय कुमार द्वारा किए गए सर्वोच्च बलिदान को सलाम करती है. उन्हें अंतिम विदाई पूरे सैन्य सम्मान के साथ दी गई थी. साथ ही कहा कि अग्निवीर अजय के परिजनों को पहले ही 98.39 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है. एडीजी पीआई ने कहा कि अग्निवीर योजना के प्रावधानों के अनुसार लगभग 67 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और अन्य लाभ पुलिस सत्यापन के बाद भुगतान किए जाएंगे. कुल राशि लगभग 1.65 करोड़ रुपये होगी.

कांग्रेस ने कहा- अग्निवीर को सिर्फ 48 लाख रुपये मिले हैं
कांग्रेस ने गुरुवार को एक बार फिर अग्निवीर को लेकर सरकार पर हमला बोला और इस बात को फिर दोहराया कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में झूठ बोला है. कांग्रेस ने इसके लिए माफी की भी मांग की है. कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के सैनिक विभाग के चेयरमैन रिटायर्ड कर्नल रोहित चौधरी ने ये आरोप लगाए और अपनी ओर से इनके संबंध में कुछ तथ्य भी रखे.

कर्नल रोहित चौधरी ने कहा कि, ‘जिस सैनिक अजय सिंह के बारे में बात हो रही है उनके बारे में आज ही पूरी जानकारी मिली है. हमने जो जानकारी हासिल की है, उसके मुताबिक अभी तक सेना की Army Group Insurance की तरफ से 48 लाख रुपये मिले हैं. बाकी का पैसा राज्य सरकार और दूसरी जगहों से मिला है. उन्होंने कहा कि, जो रक्षामंत्री ने कहा था कि 1 करोड़ दिए हैं वो गलत कहा था उसको सिर्फ 48 लाख मिले हैं.

पंजाब के दो और अग्निवीर, जिन्हें नहीं मिला मुआवजा
उन्होंने कहा कि, पंजाब के अंदर ही 3 लोग ऐसे हैं.पहले शहीद अमृतपाल, जिनको अभी तक कुछ नही मिला. अजय सिंह, जिनको सिर्फ 48 लाख मिला और सुखजिंदर सिंह, जिनकी 15 अप्रैल को मृत्यु हुई थी. उनको भी अभी तक एक भी पैसा नहीं मिला है. न ही बीमा की रकम और न ही बैटल कैजुअल्टी फंड से एक भी पैसा मिला है.

अग्निवीर और रेग्युलर सैनिक में क्या है फर्क?
इसके अलावा कांग्रेस ने अग्निवीर के परिवार को मरणोपरांत किस तरह की सहायता मिलती है, इस पर भी प्रकाश डाला. – – – कांग्रेस के मुताबिक, अग्निपथ स्कीम के तहत अग्निवीर का 48 लाख रुपये इंश्योरेंस के तहत मिलते हैं, जबकि रेग्युलर सैनिक को 75 लाख रुपये मिलते हैं.

– मुआवजा के तहत अग्निवीर को 44 लाख रुपये मिलते हैं, जबकि रेग्युलर सैनिक को 55 लाख रुपये मिलते हैं.
– रेग्युलर सैनिक को शहीद का दर्जा मिलता है, जबकि अग्निवीर को कोई दर्जा नही
– Ex-Serviceman को दर्जा नही
– दोनों को 8 लाख – 8 लाख रुपये battle casualties welfare fund से मिलेंगे जो कि दोनों के लिए बराबर हैं.
– अगर अग्निवीर सैनिक पहले ही दिन शहीद हो जाता है तो 4 साल तक पूरी सैलरी मिलेगी जो तकरीबन 13 लाख के आसपास होगी.
– अगर रेग्युलर सैनिक पहले दिन शहीद हो जाता है तो 15 साल तक पूरी सैलरी मिलेगी, उसके बाद पेंशन मिलेगी उसकी ग्रेच्युटी भी मिलेगी. मेडिकल बेनिफिट ताउम्र मिलते रहेंगे.
– रेग्युलर सैनिकों के आश्रितों यानी माता-पिता, बच्चे (25 साल तक) तक कैंटीन सुविधा, शिक्षा की सुविधा, स्कॉलरशिप, ऐसी बहुत सी सुविधाएं हैं जो उनके परिवार को मिलती है, लेकिन अग्निवीर के परिवार को अपने हाल पर छोड़ देते हैं

रेगुलर सैनिक के परिवार वालों को क्या मिलती है सहायता?
रेगुलर सैनिक की बैटल कैजुअल्टी के मामले में परिवार वालों को इंश्योरेंस का 51.8 लाख रुपये (ये कॉन्ट्रिब्यूट्री है, जिसके लिए सैनिक हर महीने पैसे जमा करते हैं) और एक्स ग्रेशिया 35 लाख रुपये मिलेगा। बैटल कैजुअल्टी होने पर बैटल कैजुअल्टी फंड से 8 लाख रुपये मिलेंगे। अगर ड्यूटी के दौरान सैनिक की मौत हुई है और वह बैटल कैजुअल्टी नहीं है तो इंश्योरेंस का पैसा मिलेगा और एक्स ग्रेशिया के तौर पर 25 लाख रुपये मिलेगा। दोनों मामलों में बैंक से एमओयू के तहत इंश्योरेंस का 50 लाख रुपये भी मिलेगा।

किसे पेंशन और किसे नहीं?
अग्निवीर की ड्यूटी के दौरान मौत होने या बैटल कैजुअल्टी होने पर उनके परिवार वालों को न तो पेंशन देने का प्रावधान है न ही उनके परिवार के लोग मिलिट्री हॉस्पिटल, ईसीएचएस और मिलिट्री कैंटीन की सुविधा लेने के हकदार हैं। उधर, रेगुलर सैनिक की बैटल कैजुअल्टी होने पर उनके परिवार को पेंशन दी जाती है। सैनिक की उस वक्त जितनी सैलरी है, उतनी ही पेंशन दी जाएगी। अगर सैनिक की ड्यूटी के दौरान मौत हुई है तो परिवार वालों को उनकी आखिरी सैलरी का 50 पर्सेंट पेंशन के तौर पर दिया जाएगा। यह 10 साल के लिए है और 10 साल बाद पेंशन के तौर पर सैलरी का 30 पर्सेंट दिया जाएगा। इनके परिवार को मिलिट्री हॉस्पिटल, आर्मी कैंटीन और ईसीएचएस की सुविधा भी मिलेगी।

डिसएबिलिटी पेंशन मिलेगी या नहीं?
अग्निवीर के लिए डिसएबिलिटी पेंशन भी नहीं है। अगर रेगुलर सैनिक ड्यूटी के दौरान कोई अंग खो देते हैं या गंभीर शारीरिक/मानसिक नुकसान से गुजरते हैं तो उन्हें डिसएबिलिटी पेंशन दी जाएगी। डिसएबिलिटी की वजह से अगर अग्निवीर को चार साल से पहले ही सेना से बाहर होना पड़े तब भी उनके लिए कोई पेंशन नहीं है, जबकि रेगुलर सैनिक अगर डिसएबिलिटी की वजह से सेना से बाहर होते हैं तो उन्हें पेंशन दी जाएगी। अग्निवीर के लिए डिसएबल होने पर कोई मेडिकल कवर भी नहीं है।

विवाद की वजह क्या है ?
अग्निपथ स्कीम के तहत भले ही युवाओं को सेना में चार साल के लिए भर्ती किया जा रहा है लेकिन वह भी देश के लिए रेगुलर सैनिक की तरह ही काम कर रहे हैं। दो लोगों की जान की कीमत अलग नहीं हो सकती। देश के लिए अग्निवार अगर जान दे रहे हैं तो उनके और रेगुलर सैनिक के परिवार वालों को मिलने वाली सहायता में अंतर ही विवाद की वजह है। लगातार मांग की जा रही है कि उनके परिवार वालों को भी उसी तरह पेंशन का सपोर्ट मिले जैसा रेगुलर सैनिक के परिवार वालों को मिलता है।

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